TEACHING PLATFORMS BY C L SIR

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TOPIC B.Ed NOTES
UNIVERSITY MAGADH UNIVERSITY, BODH GAYA
TEACH BY C L SIR
SHORT INFO

MAGADH UNIVERSITY B.Ed 1st YEAR PAPER-4 LANGUAGE ACROSS THE CURRICULUM

 

प्रश्न – भाषा के कार्य

(Function of Language: In the Classroom and Outside the Classroom)

उत्तर –

  • भूमिका 
  • कक्षा के अंदर भाषा के कार्य
  • कक्षा के बाहर भाषा के कार्य
  • निष्कर्ष 

भूमिका (Introduction)

भाषा मानव जीवन का अभिन्न अंग है। मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं, अनुभवों और ज्ञान को भाषा के माध्यम से ही व्यक्त करता है। शिक्षा व्यवस्था में भाषा का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि सम्पूर्ण शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया भाषा पर आधारित होती है। कक्षा के भीतर भाषा जहाँ सीखने का माध्यम बनती है, वहीं कक्षा के बाहर यह सामाजिक जीवन की रीढ़ है।

कक्षा के अंदर भाषा के कार्य
(Functions of Language in the Classroom)

कक्षा में भाषा का प्रयोग शिक्षक तथा विद्यार्थी दोनों करते हैं। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

1. ज्ञान का संप्रेषण
शिक्षक पाठ्यवस्तु को समझाने, उदाहरण देने तथा अवधारणाएँ स्पष्ट करने के लिए भाषा का प्रयोग करता है।

2. निर्देशात्मक कार्य
भाषा द्वारा गतिविधियों के निर्देश, गृहकार्य, परियोजना कार्य आदि बताए जाते हैं।

3. प्रश्नोत्तर कार्य
शिक्षक प्रश्न पूछकर विद्यार्थियों की समझ जाँचता है तथा विद्यार्थी अपनी शंकाएँ भाषा के माध्यम से व्यक्त करते हैं।

4. प्रेरणात्मक कार्य
प्रशंसा, उत्साहवर्धन एवं सकारात्मक शब्दों द्वारा छात्रों में सीखने की रुचि विकसित की जाती है।

5. अनुशासनात्मक कार्य
कक्षा के नियम, व्यवहार एवं समयबद्धता भाषा के माध्यम से ही नियंत्रित होती है।

6. मूल्यांकनात्मक कार्य
मौखिक परीक्षा, लिखित परीक्षण, प्रस्तुति आदि सभी भाषा पर आधारित होते हैं।

7. रचनात्मकता का विकास
कविता, निबंध, वाद-विवाद, कहानी लेखन आदि द्वारा छात्रों की सृजनात्मक क्षमता विकसित होती है।
8. सामाजिक कौशल का विकास
समूह चर्चा और सहयोगात्मक अधिगम से संवाद क्षमता बढ़ती है।

कक्षा के बाहर भाषा के कार्य
(Functions of Language Outside the Classroom)

कक्षा के बाहर भाषा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोगी है:

1. सामाजिक संपर्क
परिवार, मित्रों, पड़ोसियों से संवाद भाषा द्वारा ही संभव है।

2. भावनात्मक अभिव्यक्ति
मनुष्य अपने सुख-दुःख, प्रेम, क्रोध आदि भाव भाषा से प्रकट करता है।

3. सूचनात्मक कार्य
समाचार पत्र, टीवी, मोबाइल, इंटरनेट आदि से जानकारी प्राप्त करना।

4. व्यावहारिक जीवन में उपयोग
खरीदारी, यात्रा, बैंक, अस्पताल जैसे दैनिक कार्य भाषा से संचालित होते हैं।

5. सांस्कृतिक संरक्षण
लोकगीत, कहावतें, परंपराएँ भाषा द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती हैं।

6. व्यक्तित्व विकास
स्पष्ट बोलना, प्रभावी लिखना और आत्मविश्वास से संवाद करना व्यक्तित्व को निखारता है।

7. लोकतांत्रिक सहभागिता
भाषण, मतदान, जनसंपर्क आदि में भाषा की अहम भूमिका होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)
भाषा केवल संप्रेषण का साधन नहीं, बल्कि मानव विकास का आधार है। कक्षा के भीतर यह ज्ञान निर्माण का माध्यम है और कक्षा के बाहर सामाजिक जीवन का स्तंभ। प्रभावी भाषा प्रयोग से न केवल शिक्षण गुणवत्ता बढ़ती है, बल्कि व्यक्ति का सर्वांगीण विकास भी होता है।

 

 

 

प्रश्न – शिक्षा एवं पाठ्यक्रम में भाषा
(Language in Education and Curriculum)
उत्तर-

भूमिका-

भाषा मानव जीवन का मूल आधार है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विचार, भावना, संस्कृति और ज्ञान के आदान–प्रदान का प्रमुख साधन है। शिक्षा के क्षेत्र में भाषा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि संपूर्ण शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया भाषा पर ही आधारित होती है। पाठ्यक्रम निर्माण से लेकर कक्षा–कक्ष शिक्षण तक भाषा केंद्रीय भूमिका निभाती है।

आधुनिक शिक्षा दर्शन मानता है कि भाषा के माध्यम से ही विद्यार्थी अपने अनुभवों को अर्थ प्रदान करता है। इसलिए शिक्षा एवं पाठ्यक्रम में भाषा को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि समग्र विकास के उपकरण के रूप में देखा जाता है।

शिक्षा में भाषा का अर्थ एवं अवधारणा

शिक्षा में भाषा का अर्थ केवल पढ़ना–लिखना नहीं है, बल्कि इसमें शामिल हैं—
• सुनना
• बोलना
• पढ़ना
• लिखना
• चिंतन और अभिव्यक्ति

भाषा सीखने की प्रक्रिया को सशक्त बनाती है तथा विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक क्षमता, कल्पनाशक्ति और सामाजिक व्यवहार को विकसित करती है।

शिक्षा में भाषा की भूमिका

1. ज्ञान प्राप्ति का माध्यम
सभी विषयों—विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान—की समझ भाषा के माध्यम से ही होती है।
2. बौद्धिक विकास
भाषा चिंतन, विश्लेषण एवं तर्क शक्ति को विकसित करती है।
3. सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास
भाषा संस्कृति की वाहक होती है। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी सामाजिक पहचान बनाते हैं।
4. भावनात्मक विकास
विद्यार्थी अपनी भावनाओं को भाषा द्वारा व्यक्त करता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
5. व्यक्तित्व निर्माण
स्पष्ट भाषा प्रयोग से नेतृत्व क्षमता एवं आत्म-अभिव्यक्ति विकसित होती है।

पाठ्यक्रम में भाषा का स्थान

पाठ्यक्रम में भाषा का उद्देश्य केवल व्याकरण पढ़ाना नहीं बल्कि—
• संप्रेषण कौशल विकसित करना
• रचनात्मक लेखन को बढ़ावा देना
• आलोचनात्मक सोच विकसित करना
• बहुभाषिकता को प्रोत्साहित करना
• भाषा पाठ्यक्रम को जीवनोपयोगी बनाता है तथा विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन से जोड़ता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 में भाषा

NEP–2020 के प्रमुख बिंदु—

• कक्षा 5 (संभव हो तो 8) तक मातृभाषा में शिक्षा
• तीन-भाषा सूत्र का लचीला प्रयोग
• बहुभाषिकता को बढ़ावा
• भारतीय भाषाओं का संरक्षण
• भाषा शिक्षण में तकनीक का प्रयोग

नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक नागरिक बनाते हुए भारतीय भाषाओं से जोड़ना है।

निष्कर्ष-
शिक्षा एवं पाठ्यक्रम में भाषा केंद्रीय स्तंभ है। यह न केवल अकादमिक उपलब्धि बढ़ाती है बल्कि विद्यार्थियों को सामाजिक रूप से सक्षम बनाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 भाषा को शिक्षा का आधार मानते हुए समावेशी, बहुभाषिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शिक्षा व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त करती है
अतः स्पष्ट है कि बिना सशक्त भाषा नीति के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना अधूरी है।

 

 

प्रश्न – भाषा के कार्य

(Function of Language: In the Classroom and Outside the Classroom)

उत्तर –

भूमिका (Introduction)

भाषा मानव जीवन का अभिन्न अंग है। मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं, अनुभवों और ज्ञान को भाषा के माध्यम से ही व्यक्त करता है। शिक्षा व्यवस्था में भाषा का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि सम्पूर्ण शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया भाषा पर आधारित होती है। कक्षा के भीतर भाषा जहाँ सीखने का माध्यम बनती है, वहीं कक्षा के बाहर यह सामाजिक जीवन की रीढ़ है।

कक्षा के अंदर भाषा के कार्य
(Functions of Language in the Classroom)

कक्षा में भाषा का प्रयोग शिक्षक तथा विद्यार्थी दोनों करते हैं। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

1. ज्ञान का संप्रेषण
शिक्षक पाठ्यवस्तु को समझाने, उदाहरण देने तथा अवधारणाएँ स्पष्ट करने के लिए भाषा का प्रयोग करता है।

2. निर्देशात्मक कार्य
भाषा द्वारा गतिविधियों के निर्देश, गृहकार्य, परियोजना कार्य आदि बताए जाते हैं।

3. प्रश्नोत्तर कार्य
शिक्षक प्रश्न पूछकर विद्यार्थियों की समझ जाँचता है तथा विद्यार्थी अपनी शंकाएँ भाषा के माध्यम से व्यक्त करते हैं।

4. प्रेरणात्मक कार्य
प्रशंसा, उत्साहवर्धन एवं सकारात्मक शब्दों द्वारा छात्रों में सीखने की रुचि विकसित की जाती है।

5. अनुशासनात्मक कार्य
कक्षा के नियम, व्यवहार एवं समयबद्धता भाषा के माध्यम से ही नियंत्रित होती है।

6. मूल्यांकनात्मक कार्य
मौखिक परीक्षा, लिखित परीक्षण, प्रस्तुति आदि सभी भाषा पर आधारित होते हैं।

7. रचनात्मकता का विकास
कविता, निबंध, वाद-विवाद, कहानी लेखन आदि द्वारा छात्रों की सृजनात्मक क्षमता विकसित होती है।
8. सामाजिक कौशल का विकास
समूह चर्चा और सहयोगात्मक अधिगम से संवाद क्षमता बढ़ती है।

कक्षा के बाहर भाषा के कार्य
(Functions of Language Outside the Classroom)

कक्षा के बाहर भाषा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोगी है:

1. सामाजिक संपर्क
परिवार, मित्रों, पड़ोसियों से संवाद भाषा द्वारा ही संभव है।

2. भावनात्मक अभिव्यक्ति
मनुष्य अपने सुख-दुःख, प्रेम, क्रोध आदि भाव भाषा से प्रकट करता है।

3. सूचनात्मक कार्य
समाचार पत्र, टीवी, मोबाइल, इंटरनेट आदि से जानकारी प्राप्त करना।

4. व्यावहारिक जीवन में उपयोग
खरीदारी, यात्रा, बैंक, अस्पताल जैसे दैनिक कार्य भाषा से संचालित होते हैं।

5. सांस्कृतिक संरक्षण
लोकगीत, कहावतें, परंपराएँ भाषा द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती हैं।

6. व्यक्तित्व विकास
स्पष्ट बोलना, प्रभावी लिखना और आत्मविश्वास से संवाद करना व्यक्तित्व को निखारता है।

7. लोकतांत्रिक सहभागिता
भाषण, मतदान, जनसंपर्क आदि में भाषा की अहम भूमिका होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)
भाषा केवल संप्रेषण का साधन नहीं, बल्कि मानव विकास का आधार है। कक्षा के भीतर यह ज्ञान निर्माण का माध्यम है और कक्षा के बाहर सामाजिक जीवन का स्तंभ। प्रभावी भाषा प्रयोग से न केवल शिक्षण गुणवत्ता बढ़ती है, बल्कि व्यक्ति का सर्वांगीण विकास भी होता है।

 

प्रश्न – वर्तमान भाषा शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया एवं उसका विश्लेषण

उत्तर –

भूमिका
भाषा मानव जीवन का मूल आधार है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ और अनुभव साझा करता है। शिक्षा में भाषा केवल विषय नहीं बल्कि सभी विषयों के अधिगम का माध्यम है। आधुनिक युग में भाषा शिक्षण का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संप्रेषण क्षमता, आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता तथा सामाजिक सहभागिता का विकास करना है।

वर्तमान भाषा शिक्षण–अधिगम की अवधारणा
आज भाषा शिक्षण की प्रक्रिया निम्न सिद्धांतों पर आधारित है—
विद्यार्थी केंद्र में होता है
शिक्षक मार्गदर्शक होता है
सीखना सक्रिय एवं अनुभवात्मक होता है
मूल्यांकन निरंतर चलता रहता है
तकनीक सहायक भूमिका निभाती है
इसे Learner Centred Approach कहा जाता है।

 

वर्तमान भाषा शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया की प्रमुख विशेषताएँ

(1) विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण
पहले शिक्षक बोलता था और विद्यार्थी सुनते थे। अब विद्यार्थी स्वयं—
प्रश्न पूछते हैं
चर्चा करते हैं
समूह में कार्य करते हैं
प्रस्तुति देते हैं
इससे उनमें आत्मविश्वास और भाषा प्रयोग की क्षमता विकसित होती है।

(2) संप्रेषणात्मक दृष्टिकोण (Communicative Approach)
भाषा को नियमों तक सीमित न रखकर वास्तविक जीवन से जोड़ा जाता है।
चार कौशलों पर बल दिया जाता है:
सुनना (Listening)
बोलना (Speaking)
पढ़ना (Reading)
लिखना (Writing)
विद्यार्थी दैनिक जीवन की स्थितियों में भाषा का प्रयोग सीखते हैं।

(3) गतिविधि आधारित अधिगम
भाषा सीखने के लिए—
संवाद लेखन
कहानी निर्माण
नाटक
भूमिका अभिनय
वाद-विवाद
जैसी गतिविधियाँ कराई जाती हैं। इससे भाषा सहज रूप में सीखी जाती है।

(4) बहुभाषिक कक्षा
विद्यार्थियों की मातृभाषा को आधार बनाकर दूसरी भाषाएँ सिखाई जाती हैं। इससे—
सीखना सरल होता है
छात्र भयमुक्त रहते हैं
सांस्कृतिक सम्मान बना रहता है

(5) तकनीक आधारित भाषा शिक्षण
आज भाषा शिक्षण में—
स्मार्ट बोर्ड
मोबाइल ऐप
डिजिटल पुस्तकें
वीडियो एवं ऑडियो सामग्री
ऑनलाइन कक्षा
का प्रयोग हो रहा है।

(6) अनुभवात्मक अधिगम
Learning by Doing के माध्यम से छात्र स्वयं अनुभव प्राप्त करते हैं। जैसे—
फील्ड वर्क
इंटरव्यू
रिपोर्ट लेखन

भाषा शिक्षण में Analytics (विश्लेषण)
Analytics का अर्थ
Analytics का अर्थ है—
सीखने से संबंधित आँकड़ों का संग्रह, विश्लेषण और उसके आधार पर सुधार।

भाषा शिक्षण में Analytics के प्रमुख क्षेत्र

(1) विद्यार्थी प्रगति विश्लेषण
यह देखा जाता है—
पढ़ने की गति
शब्दावली
उच्चारण
लेखन गुणवत्ता
डिजिटल टूल द्वारा डेटा संग्रह होता है।

(2) सतत एवं समग्र मूल्यांकन
अब मूल्यांकन केवल परीक्षा नहीं—
क्विज
असाइनमेंट
मौखिक परीक्षण
कक्षा सहभागिता
भी शामिल है।

(3) कमजोर विद्यार्थियों की पहचान
Analytics से पता चलता है—
कौन पीछे है
किस कौशल में समस्या है
किसे अतिरिक्त सहायता चाहिए

(4) व्यक्तिगत अधिगम योजना
हर विद्यार्थी के लिए अलग रणनीति बनाई जाती है जिसे Personalized Learning कहते हैं।

निष्कर्ष-
वर्तमान भाषा शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया आधुनिक, सहभागी और कौशल-आधारित है। Analytics के प्रयोग से शिक्षा अधिक वैज्ञानिक, व्यक्तिगत और परिणामोन्मुख बन रही है। यदि तकनीकी संसाधन, शिक्षक प्रशिक्षण और नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन हो, तो भाषा शिक्षा समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकती है।

The End

 

प्रश्न- भाषा कौशल का विकास
(Developing Language Skills)

उत्तर –

भाषा मानव जीवन का मूल आधार है। शिक्षा की पूरी प्रक्रिया भाषा पर निर्भर करती है। एक शिक्षक के रूप में (विशेषकर B.Ed. के विद्यार्थियों के लिए) यह समझना आवश्यक है कि भाषा कौशल केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संप्रेषण, चिंतन, तर्क, विश्लेषण और व्यक्तित्व विकास से जुड़ा हुआ है।

भाषा कौशल चार प्रकार के होते हैं –

श्रवण (Listening)
वक्तृत्व (Speaking)
वाचन (Reading)
लेखन (Writing)

इनका विकास क्रमिक और परस्पर संबंधित होता है। सामान्यतः क्रम होता है:
श्रवण → वक्तृत्व → वाचन → लेखन

1️⃣ श्रवण कौशल (Listening Skill)

ध्यानपूर्वक सुनकर अर्थ ग्रहण करने की क्षमता को श्रवण कौशल कहते हैं।
उद्देश्य
शुद्ध उच्चारण की पहचान
अर्थ समझना
धैर्य एवं एकाग्रता विकसित करना
निर्देशों का पालन करना

विकास की विधियाँ
कहानी/कविता सुनाना
ऑडियो क्लिप सुनाना
निर्देश देकर कार्य कराना
श्रुतिलेख (Dictation)
प्रश्नोत्तर

मूल्यांकन के उपाय
सुनकर प्रश्नों के उत्तर देना
मुख्य बिंदु बताना
सारांश प्रस्तुत करना

समस्याएँ
ध्यान की कमी
शब्द भंडार कम होना
बाहरी व्यवधान

समाधान
शांत वातावरण
छोटे-छोटे ऑडियो
पुनरावृत्ति

2️ वक्तृत्व कौशल (Speaking Skill)
अर्थ-
अपने विचारों को मौखिक रूप में स्पष्ट और प्रभावी ढंग से व्यक्त करना वक्तृत्व कौशल है।
उद्देश्य-
आत्मविश्वास बढ़ाना
शुद्ध उच्चारण
व्याकरणिक शुद्धता
तार्किक अभिव्यक्ति

विकास की गतिविधियाँ
वाद-विवाद
समूह चर्चा
भूमिका-अभिनय
चित्र देखकर कहानी कहना
दैनिक वार्तालाप अभ्यास

शिक्षक की भूमिका
सकारात्मक प्रतिक्रिया देना
त्रुटि सुधार को प्रोत्साहनात्मक बनाना
छात्रों को बोलने के अवसर देना

 

3 वाचन कौशल (Reading Skill)
अर्थ-
लिखित सामग्री को समझकर अर्थ ग्रहण करना वाचन कौशल है।

वाचन के प्रकार

मौन वाचन
सस्वर वाचन
गहन वाचन
व्यापक वाचन

उद्देश्य
शब्द भंडार वृद्धि
समझ क्षमता
आलोचनात्मक सोच

विकास के उपाय
समाचार पत्र पढ़ना
कहानी की पुस्तकें
पाठ का सारांश
प्रश्नोत्तर अभ्यास

मूल्यांकन
समझ प्रश्न
रिक्त स्थान पूर्ति
शीर्षक देना

4 लेखन कौशल (Writing Skill)
अर्थ-
विचारों को लिखित रूप में स्पष्ट, शुद्ध एवं व्यवस्थित ढंग से व्यक्त करना लेखन कौशल है।

लेखन के प्रकार
रचनात्मक लेखन
औपचारिक लेखन
अनौपचारिक लेखन
निबंध एवं अनुच्छेद लेखन

उद्देश्य
विचारों की क्रमबद्धता
व्याकरण शुद्धता
रचनात्मकता

विकास की गतिविधियाँ
चित्र वर्णन
कहानी पूर्ण करना
डायरी लेखन
पत्र लेखन
अनुच्छेद अभ्यास

मूल्यांकन के आधार
भाषा शुद्धता
प्रस्तुति
विचारों की स्पष्टता
विषय से संबंधितता
🌟 भाषा कौशल विकास के सिद्धांत
सरल से कठिन
ज्ञात से अज्ञात
अभ्यास प्रधानता
क्रियात्मक शिक्षण
सतत एवं समग्र मूल्यांकन

🏫 कक्षा में भाषा कौशल विकास की आधुनिक रणनीतियाँ
ICT आधारित शिक्षण
स्मार्ट क्लास
भाषा प्रयोगशाला
प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण
सहपाठी शिक्षण (Peer Learning)
नाट्य विधि

भाषा कौशल और व्यक्तित्व विकास
भाषा कौशल का सीधा संबंध –
आत्मविश्वास
सामाजिक समायोजन
नेतृत्व क्षमता
रचनात्मक सोच
आलोचनात्मक दृष्टि
से है।
निष्कर्ष
भाषा कौशल का विकास एक सतत एवं जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है। शिक्षक का कर्तव्य है कि वह कक्षा में ऐसा वातावरण बनाए जहाँ विद्यार्थी बिना भय के अपनी भाषा क्षमता का विकास कर सकें।

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