BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR गणित का शिक्षण शास्त्र -1 Previous Year Question With Solution
Table of Contents
Toggle| Topic | गणित का शिक्षण शास्त्र -1 (प्राथमिक स्तर ) Previous Year Question Paper |
| Course | Bihar D.El.Ed. 1st Year Paper-8 Previous Year Question Paper |
| Paper Code | F-7 |
| Full Marks | 50 |
| External | 35 |
| Internal | 15 |
VVI NOTES के इस पेज में बिहार डी एल एड फर्स्ट ईयर पेपर F 7 गणित का शिक्षणशास्त्र-1 के पिछले साल के प्रश्न एवं उसके उत्तर को शामिल किया गया है |
(01) BIHAR D.El.Ed. 1st YEAR PAPER F7 गणित का शिक्षणशास्त्र-1 2025 Previous Year Question Paper
| TOPIC | BIHAR D.El.Ed 1st YEAR PAPER F 7 गणित का शिक्षणशास्त्र-1 2025 PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER |
| SESSION | 2024-2026 |
| COURSE | BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR |
AB JANKARI के इस पेज में बिहार डी एल एड फर्स्ट ईयर पेपर F 7 गणित का शिक्षणशास्त्र-1 2025 QUESTION PAPER को शामिल किया गया है|
खण्ड – क / Section – A
लघु उत्तरीय प्रश्न / Short Answer Type Questions
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य है :
प्रश्न-1. बच्चे गिनती कैसे सीखते हैं? संक्षेप में वर्णन करें।2025
Que- How do children learn counting? Describe in brief.
उत्तर –
भूमिका
गिनती सीखना बच्चों के गणितीय विकास का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। बच्चा जन्म से ही अपने आसपास की वस्तुओं को देखकर, छूकर, खेलकर और अनुभवों के माध्यम से संख्या की समझ विकसित करता है। परिवार, विद्यालय तथा शिक्षक के सहयोग से वह धीरे-धीरे सही ढंग से गिनती करना सीख जाता है।
बच्चे गिनती कैसे सीखते हैं
बच्चे गिनती एक ही बार में नहीं सीखते, बल्कि धीरे-धीरे विभिन्न चरणों से गुजरते हुए सीखते हैं। सबसे पहले वे अपने आसपास की वस्तुओं जैसे खिलौने, फल, पेंसिल, गेंद आदि को देखकर संख्या का अनुभव प्राप्त करते हैं। इसके बाद वे बड़ों की नकल करते हुए एक, दो, तीन… बोलना सीखते हैं।
धीरे-धीरे बच्चा वस्तुओं को छूकर एक-एक करके गिनना सीखता है। इस प्रक्रिया में वह समझता है कि प्रत्येक वस्तु को केवल एक बार गिनना है। बाद में उसे यह भी समझ में आने लगता है कि गिनती में बोला गया अंतिम अंक वस्तुओं की कुल संख्या बताता है।
विद्यालय में शिक्षक चित्र, गिनती की सामग्री, खेल, गीत, कविताएँ, ताली बजाना, सीढ़ियाँ चढ़ना तथा दैनिक जीवन की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को गिनती सिखाते हैं। इससे बच्चों की रुचि बनी रहती है और वे आसानी से सीखते हैं। नियमित अभ्यास और प्रोत्साहन से बच्चे आगे-पीछे की गिनती, वस्तुओं की तुलना तथा छोटी-छोटी संख्याओं का उपयोग भी सीख जाते हैं।
निष्कर्ष
अतः कहा जा सकता है कि बच्चे अनुभव, खेल, गतिविधियों, अवलोकन और अभ्यास के माध्यम से गिनती सीखते हैं। यदि शिक्षक बच्चों को रोचक एवं गतिविधि-आधारित वातावरण प्रदान करें, तो वे गिनती को सरलता और आनंद के साथ सीख सकते हैं। यह आगे चलकर गणित की अन्य अवधारणाओं को समझने का मजबूत आधार बनता है।
अथवा (OR)
प्रश्न- आप अपनी कक्षा में भाग करने की समझ का विकास किस प्रकार करेंगे ? उदाहरण सहित समझायें ।2025
Que- How will you develop the understanding of division in your class? Explain with examples.
उत्तर –
भूमिका
भाग (Division) गणित की एक महत्वपूर्ण संक्रिया है। भाग का अर्थ किसी वस्तु या संख्या को समान भागों में बाँटना या यह पता लगाना है कि एक संख्या में दूसरी संख्या कितनी बार समाहित होती है। यदि बच्चों को भाग की अवधारणा व्यवहारिक और रोचक तरीके से समझाई जाए, तो वे इसे आसानी से सीख सकते हैं। शिक्षक का दायित्व है कि वह बच्चों के पूर्व ज्ञान और दैनिक जीवन के अनुभवों का उपयोग करके भाग की समझ विकसित करे।
कक्षा में भाग करने की समझ का विकास
मैं अपनी कक्षा में भाग की समझ विकसित करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाऊँगा—
1. ठोस वस्तुओं का प्रयोग
शुरुआत में मैं टॉफी, कंचे, पेंसिल, फूल या चॉक जैसी वस्तुओं का प्रयोग करूँगा। इससे बच्चे स्वयं वस्तुओं को बराबर-बराबर बाँटकर भाग का अर्थ समझेंगे।
उदाहरण:
यदि 12 टॉफियाँ 4 बच्चों में बराबर बाँटनी हों, तो प्रत्येक बच्चे को 3 टॉफियाँ मिलेंगी।
अर्थात 12 ÷ 4 = 3
2. दैनिक जीवन से जोड़ना
भाग को बच्चों के रोज़मर्रा के अनुभवों से जोड़कर पढ़ाऊँगा, ताकि उन्हें विषय सरल और उपयोगी लगे।
उदाहरण:
यदि 20 आम 5 दोस्तों में बराबर बाँटने हों, तो प्रत्येक को 4 आम मिलेंगे।
3. समूह गतिविधियाँ कराना
बच्चों को छोटे-छोटे समूहों में बाँटकर समान वितरण की गतिविधियाँ कराऊँगा। इससे वे सहयोग के साथ सीखेंगे और भाग की अवधारणा स्पष्ट होगी।
4. गुणा और भाग का संबंध बताना
मैं बच्चों को समझाऊँगा कि भाग, गुणा की विपरीत क्रिया (Inverse Operation) है।
उदाहरण:
5 × 4 = 20
इसलिए
20 ÷ 5 = 4 तथा
20 ÷ 4 = 5
5. चित्र एवं शिक्षण सामग्री का उपयोग
चार्ट, चित्र, अबेकस, गणित किट तथा रंगीन आकृतियों की सहायता से भाग की प्रक्रिया को रोचक बनाऊँगा।
6. सरल से कठिन प्रश्न देना
सबसे पहले छोटे अंकों के भाग कराऊँगा और धीरे-धीरे बड़े अंकों तथा शब्द-समस्याओं (Word Problems) की ओर बढ़ूँगा।
7. खेल आधारित शिक्षण
गणितीय खेल, पहेलियाँ और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में भाग के प्रति रुचि उत्पन्न करूँगा।
8. अभ्यास एवं पुनरावृत्ति
बच्चों को नियमित अभ्यास प्रश्न तथा मौखिक गतिविधियाँ कराऊँगा, जिससे उनकी समझ मजबूत होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
उदाहरण
एक शिक्षक कक्षा में 18 पेंसिल लाता है और कहता है कि इन्हें 6 बच्चों में बराबर बाँटो। बच्चे स्वयं पेंसिल बाँटते हैं और देखते हैं कि प्रत्येक बच्चे को 3 पेंसिल मिलती हैं।
अतः
18 ÷ 6 = 3
इस प्रकार बच्चे भाग का अर्थ केवल पुस्तक से नहीं, बल्कि अनुभव के माध्यम से सीखते हैं।
निष्कर्ष
अतः कहा जा सकता है कि भाग की समझ विकसित करने के लिए शिक्षक को ठोस वस्तुओं, गतिविधियों, खेल, चित्रों तथा दैनिक जीवन के उदाहरणों का उपयोग करना चाहिए। जब बच्चे स्वयं समान वितरण का अनुभव करते हैं, तब वे भाग की अवधारणा को सरलता से समझ लेते हैं और उसे लंबे समय तक याद रखते हैं। इस प्रकार गतिविधि-आधारित एवं बाल-केंद्रित शिक्षण से भाग का ज्ञान अधिक प्रभावी और स्थायी बनता है।
प्रश्न-2. संख्यांक में अंकों के स्थानीय और अंकित मान को उदाहरण सहित समझायें । 2025
Que- Explain place value and face value of digits in a number with examples.-5
उत्तर —
भूमिका
गणित में संख्या ज्ञान (Number Sense) का महत्वपूर्ण आधार अंकित मान (Face Value) और स्थानीय मान (Place Value) है। किसी भी संख्या को सही ढंग से पढ़ने, लिखने तथा जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी संक्रियाएँ करने के लिए इन दोनों की स्पष्ट समझ आवश्यक होती है। इसलिए प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को इनकी जानकारी सरल उदाहरणों के माध्यम से दी जाती है।
विस्तार
1. अंकित मान (Face Value)
किसी संख्या में किसी अंक का स्वयं का मान ही उसका अंकित मान कहलाता है। अर्थात अंक जहाँ भी लिखा हो, उसका अंकित मान कभी नहीं बदलता।
उदाहरण:
संख्या 5,284 में—
- 5 का अंकित मान = 5
- 2 का अंकित मान = 2
- 8 का अंकित मान = 8
- 4 का अंकित मान = 4
अर्थात अंकित मान हमेशा उसी अंक के बराबर होता है।
2. स्थानीय मान (Place Value)
किसी संख्या में किसी अंक का मान उसके स्थान पर निर्भर करता है। इसी को स्थानीय मान कहते हैं। स्थान बदलने पर स्थानीय मान भी बदल जाता है।
उदाहरण:
संख्या 5,284 में—
- 5 हजार के स्थान पर है, इसलिए उसका स्थानीय मान = 5000
- 2 सैकड़ा के स्थान पर है, इसलिए उसका स्थानीय मान = 200
- 8 दहाई के स्थान पर है, इसलिए उसका स्थानीय मान = 80
- 4 इकाई के स्थान पर है, इसलिए उसका स्थानीय मान = 4
एक और उदाहरण
संख्या 7,463 में—
| अंक | स्थान | अंकित मान | स्थानीय मान |
|---|---|---|---|
| 7 | हजार | 7 | 7000 |
| 4 | सैकड़ा | 4 | 400 |
| 6 | दहाई | 6 | 60 |
| 3 | इकाई | 3 | 3 |
अंकित मान और स्थानीय मान में अंतर
| अंकित मान | स्थानीय मान |
|---|---|
| अंक का अपना मान होता है। | अंक के स्थान के अनुसार मान होता है। |
| यह कभी नहीं बदलता। | स्थान बदलने पर बदल जाता है। |
| उदाहरण: 8 का अंकित मान हमेशा 8 रहेगा। | 8 यदि दहाई के स्थान पर है तो 80, सैकड़ा के स्थान पर है तो 800 होगा। |
कक्षा में समझाने की विधि
मैं बच्चों को स्थानीय और अंकित मान समझाने के लिए स्थान-मूल्य चार्ट (Place Value Chart), अबेकस, संख्या कार्ड तथा दैनिक जीवन के उदाहरणों का प्रयोग करूँगा। बच्चों से विभिन्न संख्याएँ बनवाकर प्रत्येक अंक का स्थान और उसका मान बताने का अभ्यास कराऊँगा। इससे उनकी संख्या संबंधी समझ मजबूत होगी।
निष्कर्ष
अतः अंकित मान किसी अंक का स्वयं का मान होता है, जबकि स्थानीय मान उस अंक के स्थान पर निर्भर करता है। दोनों की सही समझ से बच्चों में संख्या ज्ञान विकसित होता है तथा वे गणितीय संक्रियाओं को अधिक सरलता और शुद्धता से कर पाते हैं। इसलिए प्राथमिक स्तर पर इन दोनों अवधारणाओं का अभ्यास उदाहरणों और गतिविधियों के माध्यम से कराना अत्यंत आवश्यक है।
अथवा (OR)
प्रश्न-‘गणित सीखना केवल गणना करना नहीं है।’ इस कथन के सम्बन्ध में अपनी राय दीजिए | 2025
Que-‘Only calculation is not learning Mathematics.’ Give your opinion regarding this statement.
उत्तर –
भूमिका
गणित केवल जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी गणनाओं तक सीमित विषय नहीं है। यह एक ऐसा विषय है जो बच्चों में सोचने, समझने, तर्क करने, समस्या का समाधान करने तथा निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित है कि “गणित सीखना केवल गणना करना नहीं है।”
गणित सीखना केवल गणना करना नहीं है-
गणित सीखने का उद्देश्य केवल संख्याओं का हिसाब करना नहीं, बल्कि बच्चों में तार्किक और रचनात्मक सोच का विकास करना भी है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
1. तार्किक सोच का विकास
गणित बच्चों को किसी समस्या पर सोचने, कारण खोजने तथा सही निष्कर्ष तक पहुँचने की क्षमता प्रदान करता है। इससे उनका तर्कशक्ति का विकास होता है।
2. समस्या समाधान की क्षमता
गणित में बच्चे विभिन्न प्रकार की समस्याओं का समाधान करना सीखते हैं। वे केवल उत्तर याद नहीं करते, बल्कि समाधान की प्रक्रिया भी समझते हैं।
3. दैनिक जीवन में उपयोगिता
गणित का उपयोग हम प्रतिदिन करते हैं, जैसे खरीदारी करना, समय देखना, दूरी मापना, बैंक का हिसाब रखना, बजट बनाना आदि। इसलिए गणित जीवन से जुड़ा हुआ विषय है।
4. पैटर्न और संबंधों की समझ
गणित बच्चों को आकृतियों, संख्याओं और घटनाओं में छिपे हुए पैटर्न तथा संबंधों को पहचानना सिखाता है। इससे उनकी विश्लेषणात्मक सोच विकसित होती है।
5. निर्णय लेने की क्षमता
गणितीय ज्ञान के आधार पर व्यक्ति सही तुलना कर सकता है, अनुमान लगा सकता है तथा उचित निर्णय ले सकता है। यह क्षमता जीवन के अनेक क्षेत्रों में उपयोगी होती है।
6. गतिविधि आधारित सीखना
आज के समय में गणित को खेल, पहेली, मॉडल, चार्ट, समूह कार्य तथा परियोजना गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाया जाता है। इससे बच्चे स्वयं अनुभव करके सीखते हैं और गणित उनके लिए रोचक बन जाता है।
उदाहरण
यदि किसी बच्चे से पूछा जाए कि 24 टॉफियाँ 6 बच्चों में बराबर बाँटनी हैं, तो वह केवल 24 ÷ 6 = 4 नहीं सीखता, बल्कि समान वितरण (Equal Sharing) की अवधारणा भी समझता है। इसी प्रकार बाजार में सामान खरीदते समय कीमत की तुलना करना, छुट्टे पैसे गिनना और कुल खर्च निकालना भी गणितीय सोच का ही भाग है।
निष्कर्ष
अतः मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ कि “गणित सीखना केवल गणना करना नहीं है।” गणित बच्चों में तार्किक चिंतन, समस्या समाधान, निर्णय क्षमता, रचनात्मकता तथा जीवनोपयोगी कौशलों का विकास करता है। इसलिए गणित का शिक्षण केवल सूत्र और गणनाएँ याद कराने तक सीमित न होकर अनुभव, गतिविधि और वास्तविक जीवन से जोड़कर किया जाना चाहिए। इसी प्रकार का शिक्षण बच्चों को गणित के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वासी और सक्षम बनाता है।
प्रश्न-3. अपनी कक्षा में क्षेत्रफल की अवधारणा विकसित करने के लिए किसी गतिविधि का वर्णन करें । 2025
Que-Explain any activity to develop the concept of area in your classroom.-5
उत्तर –
अथवा (OR)
प्रश्न-बच्चों में शून्य की समझ एवं अवधारणा विकसित करने के लिए एक गतिविधि का वर्णन करें | 2025
Que-Explain an activity to develop understanding and concept of zero among children. -5
उत्तर
प्रश्न-4. “लड़के एवं लड़कियों में गणित सीखने की एक-सी क्षमता होती है ।” इस कथन के सम्बन्ध में अपनी राय दीजिए ।2025
Que-“Boys and girls have equal ability to learn Mathematics.” Give your opinion regarding this statement. -5
अथवा (OR)
प्रश्न-एनसीएफटीई ( NCFTE ) – 2009 के संदर्भ में प्राथमिक स्तर पर गणित सीखने के क्या उद्देश्य हैं ? 2025
Que-What are the objectives of learning Mathematics at the primary level in the context of NCFTE-2009 ?
उत्तर –
प्रश्न-5. क्या गणित सीखने में गलतियाँ भी उपयोगी होती हैं ? 2025
Que-Are mistakes also useful in learning Mathematics?
उत्तर –
अथवा (OR)
प्रश्न-‘समय का मापन साठमिक प्रणाली के आधार पर होता है।’ इसकी समझ बच्चों में आप कैसे विकसित करेंगे ?2025
Que-“Time is measured on the basis of sexagesimal system.” How will you develop this understanding among children ?
उत्तर –
खण्ड – ख / Section – B
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न / Long Answer Type Questions
किसी एक प्रश्न का उत्तर 200 से 250 शब्दों में दें ।
प्रश्न-6. ‘गणित वह मार्ग है जिसके द्वारा बच्चों के मन या मस्तिष्क में तर्क करने की आदत स्थापित होती है ।’ कैसे आप इसे सिद्ध करेंगे ? 2025
Que-‘Mathematics is a way to settle in the mind or brain of children the habit of reasoning.’ How can you prove it? -10
उत्तर –
प्रश्न-7. निम्नांकित में से किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें : -2 × 5 = 10
प्रश्न-7.(क) अमूर्तता या अमूर्त चिंतन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें 2025
उत्तर –
प्रश्न-7.(ख) टैनग्राम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें 2025
उत्तर –
प्रश्न-7.(ग) दृष्टिबोधात्मक संख्याएँ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें |2025
उत्तर –
Write short notes on any two of the following:
(a) Abstraction or Abstract thinking
(b) Tangram
(c) Perceptual numbers.
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गणित का शिक्षण शास्त्र -1 (प्राथमिक स्तर ) and previos Year Question
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