BIHAR D.El.Ed. 1ST YEAR F 1 समाज, शिक्षा और पाठ्यचर्या की समझ Previous Year Question Paper
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Toggle| Topic | समाज, शिक्षा और पाठ्यचर्या की समझ Previous Year Question Paper |
| Course | Bihar D.El.Ed. 1st Year Paper- F1 Previous Year Question Paper |
| Paper Code | F-1 |
| Full Marks | 100 |
| External | 70 |
| Internal | 30 |
VVI NOTES के इस पेज में BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR PAPER F1 समाज शिक्षा और पाठ्यचर्या की समझ Previous Year Question को शमिल किया गया है | जल्द ही इसके उत्तर दिये जायेंगे |
BIHAR D.El.Ed. 1ST YEAR PAPER F1 समाज, शिक्षा और पाठ्यचर्या की समझ 2025 Previous Year Question With Answer




खंड “क” में विकल्प के साथ 6 लघु उतरीय प्रश्न दिए गये है , जिसका उत्तर 75-100 शब्दों में लिखे | प्रत्येक प्रश्न के लिए 5 अंक निर्धारित है |
खण्ड क – लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.प्राथमिक एवं द्वितीयक स्तर के समाजीकरण को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।”-2025
- भूमिका :
- प्राथमिक एवं द्वितीयक स्तर के समाजीकरण
- निष्कर्ष :
समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चा समाज के नियम, मूल्य एवं व्यवहार सीखता है। यह प्रक्रिया उसके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्राथमिक समाजीकरण परिवार में होता है। इसमें बच्चा माता-पिता से भाषा, संस्कार, शिष्टाचार एवं आदतें सीखता है। उदाहरण के रूप में बच्चा परिवार से बड़ों का सम्मान करना सीखता है।
प्रश्न .बच्चे तथा बचपन की अवधारणा को स्पष्ट करें।-2025
- भूमिका
- बच्चे तथा बचपन की अवधारणा
- निष्कर्ष
प्रश्न 2 “विद्यालय की आवश्यकता तथा महत्व का वर्णन करें।”
- भूमिका :
- विद्यालय की आवश्यकता तथा महत्व
- निष्कर्ष :
विद्यालय बच्चों को ज्ञान, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों की शिक्षा देता है। यहाँ बालक सामाजिक व्यवहार, सहयोग एवं जिम्मेदारी सीखता है। विद्यालय बच्चों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक क्षमताओं का विकास करता है। यह बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व एवं रचनात्मकता का विकास भी करता है। विद्यालय समाज एवं राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
प्रश्न .“बाल अधिकार के अर्थ को स्पष्ट करें। किन्हीं दो बाल अधिकारों का वर्णन करें।”
- भूमिका
- बाल अधिकार के अर्थ
- निष्कर्ष
सुरक्षा का अधिकार बच्चों को शोषण, हिंसा एवं दुर्व्यवहार से सुरक्षा प्रदान करता है। यह उनके सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। बाल अधिकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार हैं।
प्रश्न 3. समाजीकरण’ शब्द से आप क्या समझते हैं ? किन्हीं तीन समाजीकरण की संस्थाओं की चर्चा करें।
- भूमिका
-
समाजीकरण की तीन संस्था
- निष्कर्ष
समाजीकरण की तीन संस्था
प्रश्न.“शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलू से आप क्या समझते हैं ?”
- भूमिका :
- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलू :
- निष्कर्ष :
निष्कर्ष :
प्रश्न 4. “पुस्तकीय ज्ञान निरर्थक है।” व्याख्या कीजिए।
- भूमिका
- पुस्तकीय ज्ञान निरर्थक
- निष्कर्ष
पुस्तकीय ज्ञान निरर्थक
प्रश्न – ज्ञान क्या है? ज्ञान एवं सूचना में अंतर स्पष्ट करें।
- भूमिका
- ज्ञान एवं सूचना में अंतर
- निष्कर्ष
प्रश्न 5. ज्योतिबा फूले के प्रमुख योगदानों को लिखें।-2025
- भूमिका
- ज्योतिबा फूले के प्रमुख योगदान
- निष्कर्ष
ज्योतिबा फूले भारत के महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् और विचारक थे। उन्होंने समाज में समानता और शिक्षा के प्रसार के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
प्रश्न – स्थानीय पाठ्यचर्या से आप क्या समझते हैं? -2025
- भूमिका
- स्थानीय पाठ्यचर्या
- निष्कर्ष
प्रश्न 6. गिजूभाई की पुस्तक ‘दिवास्वप्न’ की चर्चा करें।-2025
- भूमिका
- गिजूभाई की पुस्तक ‘दिवास्वप्न’
- निष्कर्ष
गिजूभाई की पुस्तक ‘दिवास्वप्न’
प्रश्न – पाठ्यक्रम एवं पाठ्यचर्या में अंतर स्पष्ट करें।-2025
खण्ड – ख / Section – B
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न / Long Answer Type Questions
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 200 से 250 शब्दों में दें।
किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर दें।
प्रश्न 7.”सांस्कृतिक मूल्यों को सीखना समाजीकरण की प्रक्रिया है ।” इस कथन की विवेचना करें ।-2025
उत्तर
- भूमिका
- सांस्कृतिक मूल्यों को सीखना समाजीकरण की प्रक्रिया है
- निष्कर्ष
भूमिका
मनुष्य जन्म से केवल जैविक प्राणी होता है, परन्तु समाज में रहकर वह सामाजिक प्राणी बनता है। समाज के रीति-रिवाज, परम्पराएँ, नैतिक आदर्श, भाषा, धर्म तथा व्यवहार के नियमों को सीखने की प्रक्रिया को समाजीकरण कहा जाता है। सांस्कृतिक मूल्य समाज के ऐसे आदर्श होते हैं जो व्यक्ति के आचरण को दिशा देते हैं। इसलिए सांस्कृतिक मूल्यों का अर्जन समाजीकरण की मुख्य प्रक्रिया माना जाता है।
सांस्कृतिक मूल्यों को सीखना समाजीकरण की प्रक्रिया है
I. समाजीकरण का अर्थ
समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति समाज के नियमों, मान्यताओं एवं मूल्यों को सीखता है। यह प्रक्रिया जन्म से जीवनभर चलती रहती है। इसके द्वारा व्यक्ति समाज के अनुकूल व्यवहार करना सीखता है।
II. सांस्कृतिक मूल्यों का अर्थ
सांस्कृतिक मूल्य वे आदर्श एवं मान्यताएँ हैं जिन्हें समाज महत्वपूर्ण मानता है। जैसे— सत्यवादिता, सहयोग, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, सहिष्णुता एवं देशभक्ति आदि। ये मूल्य समाज की संस्कृति को सुरक्षित रखते हैं।
III. परिवार द्वारा सांस्कृतिक मूल्यों का विकास
परिवार समाजीकरण का प्रथम एवं सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। बच्चा परिवार में भाषा, शिष्टाचार, प्रेम, सहयोग तथा नैतिक व्यवहार सीखता है। माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्य अपने व्यवहार से बच्चे में सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करते हैं।
IV. विद्यालय की भूमिका
विद्यालय बालक को अनुशासन, समयपालन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्रीय भावना का ज्ञान देता है। प्रार्थना, समूह कार्य, खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यालय सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करता है।
V. समाज एवं समूहों का प्रभाव
मित्र समूह, पड़ोस, धार्मिक संस्थाएँ तथा सामाजिक संगठन व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। व्यक्ति समाज में रहकर परम्पराओं, रीति-रिवाजों तथा सामाजिक मानदण्डों को अपनाता है।
VI. संस्कृति का संरक्षण एवं हस्तांतरण
समाजीकरण के माध्यम से एक पीढ़ी अपनी संस्कृति एवं मूल्य दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित करती है। इससे समाज की संस्कृति सुरक्षित रहती है तथा सामाजिक एकता बनी रहती है।
VII. व्यक्तित्व निर्माण में योगदान
सांस्कृतिक मूल्यों को सीखने से व्यक्ति में नैतिकता, आत्मसंयम, सहानुभूति एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। इससे उसका व्यक्तित्व संतुलित एवं सामाजिक बनता है।
निष्कर्ष
अतः स्पष्ट है कि सांस्कृतिक मूल्यों को सीखना ही समाजीकरण की मूल प्रक्रिया है। समाजीकरण के माध्यम से व्यक्ति समाज के आदर्शों एवं मान्यताओं को अपनाकर एक जिम्मेदार नागरिक बनता है। यही प्रक्रिया समाज की संस्कृति के संरक्षण तथा सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने में सहायक होती है।
प्रश्न 8.बिहार के विद्यालयी शिक्षा प्रणाली पर एक लेख लिखें ।-2025
उत्तर –
- भूमिका
- बिहार की विद्यालयी शिक्षा प्रणाली
- निष्कर्ष
भूमिका
शिक्षा किसी भी समाज एवं राष्ट्र के विकास का आधार होती है। विद्यालयी शिक्षा प्रणाली बच्चों के बौद्धिक, नैतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बिहार की विद्यालयी शिक्षा प्रणाली प्राचीन शिक्षा परम्परा से जुड़ी हुई है। वर्तमान समय में राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अनेक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, जिससे विद्यालयी शिक्षा का विस्तार एवं विकास हुआ है।
बिहार की विद्यालयी शिक्षा प्रणाली
I. विद्यालयी शिक्षा की संरचना
बिहार में विद्यालयी शिक्षा मुख्यतः चार स्तरों में विभाजित है—
पूर्व-प्राथमिक शिक्षा
प्राथमिक शिक्षा
माध्यमिक शिक्षा
उच्च माध्यमिक शिक्षा
राज्य में सरकारी, निजी एवं सहायता प्राप्त विद्यालय संचालित होते हैं। विद्यालयों का संचालन मुख्यतः बिहार शिक्षा परियोजना परिषद एवं शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है।
II. प्राथमिक शिक्षा का विकास
प्राथमिक शिक्षा बच्चों की बुनियादी शिक्षा का आधार है। बिहार सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान एवं समग्र शिक्षा अभियान के माध्यम से विद्यालयों की संख्या बढ़ाई है। बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जा रही है।
III. मध्याह्न भोजन योजना का प्रभाव
विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना लागू होने से विद्यार्थियों की उपस्थिति में वृद्धि हुई है। इससे गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को विद्यालय से जोड़ने में सहायता मिली है।
IV. बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन
बिहार सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए साइकिल योजना, पोशाक योजना एवं छात्रवृत्ति जैसी योजनाएँ प्रारम्भ की हैं। इन योजनाओं से बालिकाओं के नामांकन एवं उपस्थिति में वृद्धि हुई है।
V. शिक्षक एवं शिक्षण व्यवस्था
विद्यालयी शिक्षा में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। डिजिटल शिक्षा एवं आधुनिक शिक्षण विधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
VI. तकनीकी एवं डिजिटल शिक्षा
वर्तमान समय में बिहार के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर शिक्षा एवं डिजिटल सामग्री के उपयोग पर बल दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान एवं तकनीकी कौशल प्राप्त हो रहा है।
VII. विद्यालयी शिक्षा की समस्याएँ
यद्यपि शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति हुई है, फिर भी कई समस्याएँ विद्यमान हैं। विद्यालयों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों की अनुपस्थिति, आधारभूत संरचना की कमजोरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी प्रमुख समस्याएँ हैं।
VIII. सुधार के उपाय
विद्यालयों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना, शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। समाज एवं अभिभावकों की भागीदारी भी शिक्षा सुधार में महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
अतः कहा जा सकता है कि बिहार की विद्यालयी शिक्षा प्रणाली निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं एवं सुधारों के कारण शिक्षा का प्रसार बढ़ा है। यदि शिक्षा की गुणवत्ता एवं आधारभूत सुविधाओं पर और अधिक ध्यान दिया जाए, तो बिहार की विद्यालयी शिक्षा प्रणाली और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बन सकती है।
प्रश्न 9.“शिक्षा नए समाज बनाने की एक प्रक्रिया है ।” वर्णन कीजिए ।-2025
उत्तर –
भूमिका
शिक्षा मानव जीवन के विकास का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। यह केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया भी है। शिक्षा मनुष्य के विचारों, व्यवहारों एवं मूल्यों में परिवर्तन लाकर समाज को नई दिशा प्रदान करती है। इसलिए कहा जाता है कि “शिक्षा नए समाज बनाने की एक प्रक्रिया है।”
“शिक्षा नए समाज बनाने की एक प्रक्रिया है”
I. सामाजिक परिवर्तन का साधन
शिक्षा समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों एवं असमानताओं को दूर करने में सहायक होती है। यह लोगों में जागरूकता उत्पन्न करती है तथा सामाजिक सुधार की भावना विकसित करती है। शिक्षा के माध्यम से समाज प्रगतिशील एवं आधुनिक बनता है।
II. नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का विकास
शिक्षा व्यक्ति में सत्य, अहिंसा, सहयोग, सहिष्णुता एवं अनुशासन जैसे गुणों का विकास करती है। इन मूल्यों के आधार पर एक आदर्श एवं सभ्य समाज का निर्माण होता है।
III. लोकतांत्रिक समाज की स्थापना
शिक्षा नागरिकों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती है। यह समानता, स्वतंत्रता एवं बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देती है। शिक्षित नागरिक लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं तथा समाज में न्याय एवं समान अवसरों की स्थापना करते हैं।
IV. आर्थिक विकास में योगदान
शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान एवं कौशल प्रदान करती है, जिससे वह आत्मनिर्भर बनता है। शिक्षित एवं कुशल मानव संसाधन राष्ट्र की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इससे समाज का जीवन स्तर ऊँचा होता है।
V. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास
शिक्षा व्यक्ति में तार्किक एवं वैज्ञानिक सोच विकसित करती है। इससे लोग अंधविश्वासों से मुक्त होकर तर्क एवं प्रमाण के आधार पर निर्णय लेना सीखते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण आधुनिक एवं प्रगतिशील समाज की पहचान है।
VI. संस्कृति का संरक्षण एवं विकास
शिक्षा समाज की संस्कृति, परम्पराओं एवं मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करती है। साथ ही, यह बदलते समय के अनुसार नई विचारधाराओं को भी स्वीकार करने की प्रेरणा देती है।
VII. समानता एवं सामाजिक न्याय की स्थापना
शिक्षा सभी वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती है। यह जाति, धर्म, लिंग एवं आर्थिक भेदभाव को कम करने में सहायक होती है। शिक्षित समाज में समानता एवं सामाजिक न्याय की भावना मजबूत होती है।
निष्कर्ष
अतः स्पष्ट है कि शिक्षा केवल विद्यालयी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नए एवं आदर्श समाज के निर्माण की आधारशिला है। शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करती है तथा समाज में परिवर्तन, प्रगति एवं समानता लाने का कार्य करती है। इसलिए शिक्षा को नए समाज निर्माण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया कहा जाता है।
प्रश्न 10. जॉन डीवी के शैक्षिक दर्शन की व्याख्या कीजिए ।-2025
उत्तर-
भूमिका
John Dewey आधुनिक शिक्षा के महान दार्शनिक एवं शिक्षाशास्त्री थे। वे प्रयोगवाद (Pragmatism) के प्रमुख समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने शिक्षा को जीवन से जोड़ने पर बल दिया। उनके अनुसार शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि अनुभवों के माध्यम से निरंतर विकास की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के शैक्षिक विचारों ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली को गहराई से प्रभावित किया।
जॉन डीवी के शैक्षिक दर्शन
I. शिक्षा का अर्थ
जॉन डीवी के अनुसार शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं, बल्कि स्वयं जीवन है। शिक्षा का उद्देश्य बालक के अनुभवों का पुनर्निर्माण एवं विकास करना है। उन्होंने शिक्षा को सतत एवं गतिशील प्रक्रिया माना।
II. प्रयोगवाद का सिद्धांत
डीवी प्रयोगवाद के समर्थक थे। उनके अनुसार सत्य वही है जो व्यवहार में उपयोगी सिद्ध हो। शिक्षा को व्यावहारिक एवं अनुभव आधारित होना चाहिए, ताकि बालक वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान करना सीख सके।
III. “करके सीखना” का सिद्धांत
जॉन डीवी ने “Learning by Doing” अर्थात् “करके सीखना” पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार बालक केवल सुनकर नहीं, बल्कि कार्य एवं अनुभव के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से सीखता है। इसलिए शिक्षण प्रक्रिया में गतिविधियों एवं प्रयोगों का महत्व अधिक है।
IV. बालक-केंद्रित शिक्षा
डीवी ने शिक्षा को बालक-केंद्रित बनाने पर बल दिया। उनके अनुसार पाठ्यक्रम एवं शिक्षण विधियाँ बालक की रुचि, आवश्यकता एवं क्षमता के अनुसार होनी चाहिए। शिक्षक को मार्गदर्शक एवं सहयोगी की भूमिका निभानी चाहिए।
V. लोकतांत्रिक शिक्षा का विचार
जॉन डीवी ने विद्यालय को समाज का लघु रूप माना। उनके अनुसार विद्यालय में लोकतांत्रिक वातावरण होना चाहिए, जहाँ बालकों को स्वतंत्रता, सहयोग एवं सहभागिता का अवसर मिले। इससे उनमें सामाजिक गुणों का विकास होता है।
VI. अनुभव आधारित पाठ्यक्रम
डीवी ने ऐसे पाठ्यक्रम का समर्थन किया जो जीवनोपयोगी एवं अनुभव आधारित हो। उन्होंने पुस्तकीय ज्ञान की अपेक्षा व्यावहारिक ज्ञान को अधिक महत्व दिया।
VII. शिक्षक की भूमिका
डीवी के अनुसार शिक्षक का कार्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि बालकों के अनुभवों को सही दिशा देना है। शिक्षक को प्रेरक, मार्गदर्शक एवं सहायक के रूप में कार्य करना चाहिए।
VIII. अनुशासन संबंधी विचार
उन्होंने दमनात्मक अनुशासन का विरोध किया। उनके अनुसार अनुशासन बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता एवं आत्मनियंत्रण से विकसित होना चाहिए।
निष्कर्ष
अतः स्पष्ट है कि जॉन डीवी का शैक्षिक दर्शन आधुनिक एवं व्यावहारिक शिक्षा पर आधारित है। उन्होंने शिक्षा को अनुभव, गतिविधि एवं लोकतंत्र से जोड़कर बालक के सर्वांगीण विकास पर बल दिया। उनके विचार आज भी आधुनिक शिक्षण पद्धतियों एवं बालक-केंद्रित शिक्षा के आधार माने जाते हैं।
प्रश्न (क) केस स्टडी
प्रश्न (ख) बिहार पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2008
प्रश्न (ग) ज्ञान के विविध स्वरूप ।
Write short notes on any two of the following:
(a) Case study
(b) Bihar Curriculum Framework-2008
(c) Different forms of Knowledge.
BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR PAPER F1 समाज शिक्षा और पाठ्यचर्या की समझ 2023 Previous Year Question
खण्ड क / Section – A
लघु उत्तरीय प्रश्न / Short Answer Type Questions
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य है :
It is compulsory to answer each question
1. बच्चे तथा बचपन से आप क्या समझते हैं? उदाहरण के माध्यम से इसे स्पष्ट कीजिए।
अथवा, समाजीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करें।
2. ‘शिक्षा’ का क्या तात्पर्य है? परिभाषा के माध्यम से स्पष्ट कीजिए।
अथवा, शिक्षा की प्रकृति कैसी होनी चाहिए? स्पष्ट कीजिए।
3. ज्ञान क्या है? ज्ञान कैसे प्राप्त किया जाता है?
अथवा, ज्ञान तथा सूचना में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
4. शिक्षा नए समाज बनाने की एक प्रक्रिया है। स्पष्ट करें।
अथवा, शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है। वर्णन करें।
5. विद्यालय के अंदर और बाहर के ज्ञान के बीच गहरा जुड़ाव है। क्या आप सहमत हैं? उदाहरण के माध्यम से स्पष्ट करें।
अथवा, स्थानीय तथा सार्वभौम ज्ञान में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
6. पाठ्यचर्या और पाठ्यक्रम में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा, विद्यालय में पाठ्यचर्या की आवश्यकता क्यों पड़ती है? स्पष्ट कीजिए।
खण्ड – ख / Section – B
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न / Long Answer Type Questions
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 200 से 250 शब्दों में दें। किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर दें।
Answer each question in approximately 200 to 250 words.
Give answers of any 4 questions.
7. “सर्वोच्च शिक्षा वही है जो सम्पूर्ण सृष्टि से हमारे जीवन का सामंजस्य स्थापित करें।”
व्याख्या करें।
8. बच्चों के समाजीकरण में माता-पिता तथा समुदाय की भूमिका को उपयुक्त उदाहरणों
के साथ वर्णन करें।
9. जे० कृष्णमूर्ति के शैक्षिक विचारों की चर्चा करें। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता
पर विचार करें।
10. बच्चों की पाठ्य-पुस्तकें शिक्षा, ज्ञान एवं समाजीकरण के माध्यम के रूप में किस प्रकार
है? उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट कीजिए।
11. निम्नांकित में से किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें :
(क) अच्छे शिक्षण की विशेषताएँ।
(ख) राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005
(ग) डॉ० जाकिर हुसैन।
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BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR PAPER F1 समाज, शिक्षा और पाठ्यचर्या की समझ 2020 Previous Year Question
खण्ड – क / Section A
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य है :
It is compulsory to answer every question :
1. बच्चों के समाजीकरण में समुदाय की भूमिका का उल्लेख करें ।
Explain the role of society in socialization of children.
अथवा / OR
प्रमुख बाल अधिकारों का उल्लेख करें ।
Mention important child rights.
2. “समाजीकरण” की अवधारणा को स्पष्ट करें ।
Explain the concept of “Socialization”.
अथवा / OR
विद्यालय के सामाजिक आधार का वर्णन करें ।
Explain the social basis of school.
3. बच्चों के समाजीकरण को परिवार की पालन-पोषण शैलियाँ किस प्रकार प्रभावित करती है। विश्लेषण करें ।
How family’s upbringing influences socialization of children? Analyse.
अथवा / OR
विद्यालयों में समाजीकरण को प्रभावित करनेवाले प्रमुख कारकों की प्रक्रिया में शिक्षकों को भूमिका को स्पष्ट करें ।
Explain the role of teachers in important factors which influence the socialization of children in schools.
4. पुस्तकीय ज्ञान निरर्थक है । व्याख्या कीजिए ।
Bookish knowledge is useless. Explain.
अथवा / OR
“शिक्षा नए समाज बनाने की एक प्रक्रिया है ।” वर्णन कीजिए ।
“Education is a process to build new society.” Explain.
5, सूचना और ज्ञान में क्या अंतर है ? स्पष्ट करें ।
What are the differences between information and knowledge ? Explain.
अथवा / OR
विद्यालय के अंदर और बाहर के ज्ञान में गहरा जुड़ाव है । कैसे ? स्पष्ट करें ।
There is a deep connection between knowledge attained inside and outside the school. How? Explain.
6.ज्ञान मीमांसा से आप क्या समझते हैं ? विवेचना करें ।
What do you mean by epistemology ? Explain.
अथवा / OR
ज्ञान प्राप्ति के मुख्य स्रोत क्या हैं ? स्पष्ट करें ।
What are the main sources of attaining knowledge ? Explain.
खण्ड – ख / Section B
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न / Long Answer Type Questions
प्रत्येक 200 से 250 शब्दों में उत्तर दें। किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर दें ।
Answer in 200 to 250 words each.
Give answers of any 4 questions.
7. ज्ञान की अवधारणा को विस्तारित रूप से समझाइए । 10
Explain the concept of knowledge in detail.
8. गिजुभाई के पुस्तक “दिवास्वप्न” एक ऐसे शिक्षक की कथा है जो शिक्षा की ढकियानुसी संस्कृति को नहीं स्वीकारता औप परंपरा च पाठ्यपुस्तकों की सचेत अवहेलना करके बच्चों के प्रति सरस ओर प्रयोगशील बना रहता है। कैसे ? विश्लेषण करें। 10
Gijubhai’s book “Diwaswapna” is the story of a teacher who does not accept the redundant, traditional and conventional method of textbook knowledge of education and continues to experiment and innovate to make education interesting for the children. How ? Analyse.
9. “शिक्षा” पुस्तक में कविगुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कैसो विशेषतावाली शिक्षा की कल्पना को है ? वर्तमान संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर विचार करें । 10
What characteristics of Education Kabiguru Rabindranath Tagore has visualized in his book “Shiksha ” ? Explain its relevancy in present context.
10. पाठ्यचर्चा तथा पाठ्यक्रम की अवधारणा के बीच अंतर को उपयुक्त उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट कीजिए । 10
Explain the differences between the concepts of curriculum and syllabus with suitable examples.
11. निम्नांकित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखें : 2 x 5 = 10
(क) जॉन डीबी
(ख) अच्छे शिक्षण की विशेषताएँ
(ग) राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा 2005 (NCF 2005) के मार्गदर्शक सिद्धांत ।
Write short notes on any two of the following:
(a) John Dewey
(b) Characteristics of good teaching
(c) Directive Principles of National Curriculum Framework 2005 (NCF 2005).
BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR PAPER F1 समाज शिक्षा और पाठ्यचर्या की समझ 2019 PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER
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