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Balyavastha Evam Uska Vikas Notes | Veer Bahadur Singh Purvanchal University

CHILDHOOD AND GROWING UP NOTES

विषय  बाल्यावस्था और उसका विकास 
SUBJECT Balyavastha Evam Uska Vikas
SUBJECT CHILDHOOD AND GROWING UP
UNIVERSITY  VEER BAHADUR SINGH PURVANCHAL UNIVERSITY  
COURSE   बी.एड  प्रथम सेमेस्टर
PAPER 1
 CODE 101
info इस पेज में    वीर बहादुर सिंह विश्वविद्यालय बी.एड  प्रथम  सेमेस्टर  के बाल्यावस्था और उसका विकास  , नोट्सको शामिल किया  गया है |

CHILDHOOD AND GROWING UP NOTES

खण्ड-अः अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

(Section- A : Very Short Answer Type Questions) (10 × 2 = 20)

निर्देश: इस खण्ड में प्रश्न संख्या 1 (i से x) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न है। परीक्षार्थियों को सभी दस प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक निर्धारित हैं।

प्रश्न 1. इस प्रश्न के सभी भागों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक भाग का उत्तर लगभग 50 शब्दों में दीजिए।

 

प्रश्न i (a) भारतीय दर्शन में अहं की संकल्पना क्या है?

उत्तर-

इरिक्सन ने अहम को विकास के लिए अधिक महत्त्वपूर्ण बताया है और यह मानते हैं कि समझ आ जाने पर व्यक्ति वास्तविकताओं की परख करके जीवन को सन्तुलित बना सकता है। इनके अनुसार बालक का सामाजिक परिवेश शीघ्र ही माता-पिता के अतिरिक्त अन्य लोगों तक फैलने लगता है और वे उसके व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

 

प्रश्न i (b) यौन शिक्षा की आवश्यकता किस अवस्था में होती है?
उत्तर –

यौन शिक्षा की आवश्यकता किशोरावस्था में होती है। किशोरावस्था में काम प्रवृत्ति क्रियाशील हो उठती है । बाल्यावस्था की समलिंगीय प्रेम भावना किशोरावस्था में विषमलिंगीय प्रेम भावना में बदल जाती है। इस अवस्था में लड़के-लड़कियों से सम्पर्क सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयास करते हैं तथा लड़कियाँ-लड़कों से बोलने, साथ घूमने तथा सम्पर्क स्थापित करने की इच्छा रखती हैं

प्रश्न i (c)बालक के सामाजिक विकास में घर की भूमिका ।

उत्तर –

बालक के सामाजिक विकास में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। माता-पिता के व्यक्तित्व का बालक के व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है। समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा बालक के असभ्य व्यवहार को उचित दिशा प्रदान की जाती है, घर में समाजीकरण की प्रक्रिया बालक को सामाजिक मूल्यों के अनुसार आचरण करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

प्रश्न i (d) वृद्धि का अर्थ बताइए।
वृद्धि को परिभाषित कीजिए।
उत्तर –

हरलॉक के अनुसार, “गर्भधारण के बाद ही गर्भस्थ शिशु में विवृद्धि होने लगती है। यह विवृद्धि गर्भस्थ शिशु के आकार और संरचना में होती है। यह विवृद्धि परिपक्वता तक चलती रहती है। विवृद्धि बालक के शरीर और संरचना में ही नहीं होती बल्कि उसके आंतरिक अंगों और मस्तिष्क में भी होती है। मस्तिष्क में जैसे विवृद्धि होती जाती है, बालक में सीखने, स्मरण तथा तर्क आदि की क्षमता अधिक आती जाती है।”

 

प्रश्न i (e) घर को शिक्षा का प्रभावशाली अभिकरण बनाने के दो उपाय बताइए।
उत्तर-

1. सीखने का प्रथम स्थान सीखने का प्रथम स्थान माता-पिता एवं घर या परिवार है, जहाँ बालक बहुत सी बातें सीखता है। रेमाण्ट के शब्दों में “सामान्य रूप से घर ही वह स्थान है, जहाँ बालक अपनी माँ से चलना, बोलना, मैं और में तुम अन्तर करना और अपने चारों ओर की वस्तुओं के सभी गुणों को सीखता है।”

2. मूल्यों एवं आदतों का विकास-घर का प्रभाव बालक में कुछ मूल्यों और आदतों का विकास करता है। वह अपने पिता से न्याय, माता से प्रेम और भाई- बहनों से भ्रातृत्व भावना सीखता है।

 

प्रश्न i (F) बालक के मानसिक विकास में परिवार की भूमिका बताइए।
उत्तर –
परिवार का शांत एवं सुखद वातावरण बालक के मानसिक विकास को बहुत प्रभावित करता है। इस सम्बन्ध में एक मनोवैज्ञानिक ने कहा है-“एक अच्छा परिवार, जिसमें माता-पिता में अच्छे सम्बन्ध होते हैं। जिसमें वे अपने बच्चों की रुचियों और आवश्यकताओं को समझते हैं एवं जिसमें आनन्द और स्वतन्त्रता का वातावरण होता है, प्रत्येक सदस्य के मानसिक विकास में अत्यधिक योग देता है।”

 

प्रश्न i (g) नैतिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
नैतिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक निम्न हैं-

(i) परिवार
(ii) मित्रमण्डली
(iii) विद्यालय
(iv) वैयक्तिक भिन्नताएँ।

प्रश्न i (h) आतंकवाद रोकने के प्रमुख उपाय बताइए।
उत्तर-
आतंकवाद रोकने के प्रमुख उपाय निम्न हैं-
(i) यदि सभी राष्ट्र आतंकवादियों को अपने शत्रु विरोधी देशों के विरुद्ध प्रशिक्षण, शरण और प्रोत्साहन देना बन्द कर दें तो आतंकवाद में कमी आ सकती है।
(ii) विश्वस्तर पर आचार संहिता बनायी जाए जिसका पालन सभी देश करें। इससे आतंकवादियों को पहचानने में सहायता हो जायेगी।
(iii) युवा वर्ग को शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त अवसर सुगम कराये जायँ ।
(iv) अपहरण एवं बन्धक जैसी आतंकवादी कार्यवाहियों से निपटने हेतु विशिष्ट कमाण्डो बल तैयार किया जाय।

प्रश्न i (i) पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की प्रमुख अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर-

पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाओं का वर्णन किया है जो निम्नवत हैं-
(i) स्नायु पेशीय अवस्था
(ii) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था
(iii) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था
(iv) औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था ।

प्रश्न i(j) नैतिक विकास के स्तरों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
(i) जन्म के समय बालक में नैतिकता सम्बन्धी भावना अविकसित रूप में होती है।
(ii) तीन वर्ष की आयु में बालक दूसरों के अधिकारों को भी मान्यता देने लगता है।
(iii) तीन से छह वर्ष की आयु के बालक का व्यवहार अब भी प्रौढ़ व्यक्तियों की निन्दा एवं प्रशंसा पर निर्भर करता है
(iv) छह से नौ वर्ष का बालक न्याय व दयाभाव में गहरी आस्था रखता है। बालक के चरित्र में सामाजिकता का विकास धीरे-धीरे होता है।

प्रश्न i (k) विकास की चारों अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
विकास की प्रमुख अवस्थाएँ क्या है ?

विकास की चार अवस्थायें निम्नवत् हैं-

(1) शैशवावस्था-यह जन्म से 14 दिन की अवस्था है। इस अवस्था में शिशु को नवजात शिशु कहते हैं

(2) बाल्यावस्था- इसकी अवधि 6 से 12 वर्ष तक मानी जाती है। बाल्यावस्था वास्तव में मानव जीवन का वह स्वर्णिम समय है जिमसें उसका सर्वांगीण विकास होता है। इसे जीवन का ‘अनोखा काल’ कहा जाता है

(3) किशोरावस्था-इसकी अवधि 13 से 18 वर्ष मानी जाती है। इस अवस्था को संघर्ष एवं तूफान की अवस्था कहा जाता है।

(4) प्रौढ़ावस्था-इस अवस्था की अवधि 21 से 40 वर्ष तक मानी गयी है।

प्रश्न i (L)नगरीकरण क्या है?
उत्तर –

नगरीकरण एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसका प्रयोग एक विशिष्ट जीवन के ढंग को पहचानने के लिए किया जाता है। यह विशिष्ट ढंग नगर निगम से सम्बन्धित होता है। नगरीकरण एक गतिशील प्रक्रिया है जो ग्रामीण एवं नगरीय दोनों प्रकार के जीवन में सदैव परिलक्षित होती है। बर्गल (E.E. Bergel) के अनुसार – “जिस प्रक्रिया द्वारा ग्रामीण क्षेत्र नगरीय क्षेत्रों में परिवर्तित होते हैं उसे नगरीकरण कहते हैं।” नगरीकरण व्यक्ति की विचारधारा, आपसी बर्ताव तथा कार्य करने की मनोवृत्ति को परिवर्तित करने की प्रक्रिया है जिसके परिणामस्वरूप विशेषीकरण तथा श्रम-विभाजन की गति में तीव्रता आती है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि नगरीकरण व्यक्तियों के व्यवहार एवं दृष्टिकोण तथा सामाजिक मान्यताओं में मौलिक परिवर्तन लाने वाली प्रक्रिया है। अतः नगरीकरण का अर्थ है जीवन के विभिन्न पहलुओं में अन्तर लाना।

प्रश्न i (m) इरिक्सन द्वारा बतायी गयी विकास की आठ अवस्थाओं को लिखिए।
उत्तर—

इरिक्सन ने विकास की निम्नलिखित आठ अवस्थाएँ बतायी हैं-

1. जन्म से प्रथम वर्ष (अनास्था)
2. द्वितीय वर्ष
3. 3-5 वर्ष
4. छठें वर्ष से यौवनारम्भ
5. किशोरावस्था (13-18 वर्ष)
6. प्रारम्भिक प्रौढ़ावस्था (19-35 वर्ष)
7. युवा एवं मध्य प्रौढ़ावस्था (36-55 वर्ष)
8. उत्तर प्रौढ़ावस्था (55 + )।

प्रश्न i (N) वैश्वीकरण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर –
Chambers 20th Century Dictionary में इस शब्द को इस प्रकार परिभाषित किया गया कि “वैश्वीकरण का अर्थ है- वैश्विक अर्थात् विश्वव्यापी बना देना या सम्पूर्ण विश्व अथवा सभी लोगों को प्रभावित करना या उनका ध्यान रखना।”

लैचनर के अनुसार, “वैश्वीकरण का अर्थ है- वैश्विक सम्बन्धों का विस्तार, सामाजिक जीवन का विश्व स्तर पर संगठन अथवा चेतना का विकास।”

एन०बी० गोडके ने Dictionary of Economics में बताया है कि “वैश्वीकरण विश्व अर्थव्यवस्था में बढ़ते हुए आर्थिक एकीकरण और राष्ट्रों के बीच बढ़ती आपसी निर्भरता की प्रक्रिया है। यह केवल वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीकी एवं लोगों की बढ़ती हुई गतिशीलता से ही नहीं वरन् उस आर्थिक संगठन से भी जुड़ी हुई है जो राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर देता है।”

प्रश्न : (0) बाल्यावस्था किसे कहते हैं?
उत्तर-

सामान्यतः 6 से 12 वर्ष की आयु के बीच की अवधि को बाल्यावस्था कहा जाता है क्योंकि इस अवधि में बालक प्राथमिक विद्यालय की शिक्षा प्रारम्भ करता है इसलिए शिक्षाशास्त्री इसे प्रारम्भिक विद्यालय आयु भी कहते हैं। इस अवधि में बालक में स्फूर्ति अधिक होने के कारण कुछ लोग इसे स्फूर्ति-अवस्था भी कहते हैं। ब्लेयर, जोन्स एवं सिम्पसन के अनुसार- “शैक्षिक दृष्टिकोण से जीवन-चक्र में बाल्यावस्था से अधिक कोई महत्त्वपूर्ण अवस्था नहीं है। जो शिक्षक इस अवस्था के बालकों को शिक्षा देते हैं, उन्हें बालकों का, उनकी आधारभूत आवश्यकताओं का, उनकी समस्याओं एवं उनकी परिस्थितियों की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए जो उनके व्यवहार को रूपान्तरित और परिवर्तित करती हैं।”

प्रश्न i (p) शैक्षिक अवसरों की समानता में अध्यापक की कोई दो भूमिकाएँ।
उत्तर –

(i) अध्यापक को कक्षा में उपस्थित बच्चों से लिंग-भेद एवं जाति-भेद की अनदेखी करते हुए सबको समान शिक्षा प्रदान करनी चाहिए।

(ii) अध्यापक को चाहिए बच्चों को उनकी शारीरिक व मानसिक दुर्बलता एवं सामर्थ्य का ध्यान रखे बिना शिक्षा प्रदान करनी चाहिए जिससे सभी को ज्ञानार्जन का समान अवसर प्राप्त हो तथा बालक किसी कुंठा का शिकार न हो।

प्रश्न i (Q) अच्छे पड़ोस के सम्बन्ध में चार बिन्दुओं को लिखिए।
उत्तर –

(i) अच्छा पड़ोस बालक को बुरी संगति से बचाता है।
(ii) यह बच्चों में अच्छे संस्कार सिखाने का साधन बनता है। जी
(iii) बाहरी संकट से बच्चों की रक्षा करता है।
(iv) यह बच्चों में आत्म-सम्मान और आत्मरक्षा के विकास में सहायक होता है।

प्रश्न i (R)अच्छे नागरिक के विषय में कुछ बिन्दुओं को चिह्नित कीजिए।
उत्तर –

(i) एक अच्छे नागरिक को राज्य द्वारा निर्मित नियम जिनका उद्देश्य राज्य में व्यवस्था और शान्ति बनाए रखना है, का पालन करना चाहिए।
(ii) देश-प्रेम की भावना आदर्श नागरिकता का प्रमुख गुण
(iii) नागरिकों को राज्य द्वारा लगाये गये करों का यथासमय भुगतान करना चाहिए।
(iv) सरकारी भवन, बसें, रेल, हवाई जहाज आदि को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।
(v) अपने कार्य व्यवहार एवं वचनों से राष्ट्र की मर्यादा एवं गौरव को बढ़ाना एवं कायम रखना चाहिए।

प्रश्न i (s) विकास के तीन सिद्धान्त।
उत्तर
विकास के तीन सिद्धान्त इस प्रकार हैं-
(i) पियाजे का सिद्धान्त,
(ii) फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त,
(iii) पुनर्बलन सिद्धान्त।

प्रश्न i (t) बालक के विकास को प्रभावित करने वाले तीन कारक।
उत्तर-

बालक के विकास को प्रभावित करने वाले तीन कारक इस प्रकार हैं-
(i) बुद्धि या मानसिक योग्यता
(ii) अंतःस्रावी ग्रन्थियाँ
(iii) वंशानुक्रमण।

प्रश्न i (u) संवेगात्मक विकास की तीन विशेषताएँ ।
उत्तर-
(i) बालकों के संवेगों का समय बहुत कम होता है।
(ii) बालकों के संवेग बहुत उग्र होते हैं।
(iii) बालकों के संवेगों में बहुत शीघ्र परिवर्तन होता रहता है।

प्रश्न ii (A) भाषा विकास को प्रभावित करने वाले दो तत्त्व।
उत्तर
(i) शारीरिक रचना-कुछ बालकों की जन्म से शारीरिक रचना ऐसी होती है कि वह जल्दी बलबलाने, शब्द बनाने तथा वाक्य रचना करने लगते हैं।

(ii) शारीरिक स्वास्थ्य-जिन बालकों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है उनका भाषा विकास तीव्र गति से होता है।

प्रश्न ii (B) सामाजिक विकास की पाँच कसौटियाँ।
उत्तर –

मिचेल ने सामाजिक विकास के छह मापदण्ड बताये हैं-
(i) अशिक्षा से सार्वभौमिक शिक्षा की ओर रूपान्तर ।
(ii) एकतंत्र से प्रजातंत्र तथा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की ओर परिवर्तन ।
(iii) कानून के समक्ष सभी की समानता में वृद्धि ।
(iv) राष्ट्रीय प्रभुसत्ता में वृद्धि ।
(v) धन के केन्द्रीकरण से उचित और न्यायपूर्ण वितरण की ओर परिवर्तन ।
(vi) स्त्रियों की स्थिति में दासी के स्थान पर साथी के रूप में परिवर्तन ।

प्रश्न ii (C)शान्ति व्यवस्था में पाँच बाधक तत्त्वों के नाम बताइए।
उत्तर –
(i) समाज में व्याप्त अराजकता।
(ii) भग्न या टूटे परिवार शान्ति व्यवस्था में बाधा पहुँचाते हैं।
(iii) जिन परिवारों के सदस्य अपराधी होते हैं, उनमें बच्चे भी अपराधी प्रवृत्ति की ओर प्रवृत्त होते हैं।
(iv) बालक बुरे साथियों की संगति में भी बिगड़ जाते हैं।

प्रश्न ii (d) वृद्धि एवं विकास से क्या आशय है?
उत्तर-
शिक्षा के क्षेत्र में वृद्धि और विकास का अत्यन्त महत्त्व है। शिक्षा मनोविज्ञान बालक के विकास के विभिन्न पक्षों व विकास की विभिन्न अवस्थाओं में घटित होने वाली वृद्धि- विकास की प्रक्रिया के स्वरूप तथा बालक-बालिकाओं में होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक, नैतिक, आदि परिवर्तनों का ज्ञान कराता है, जिससे विभिन्न आयु के बालकों के विकास के लिये प्रशिक्षण, अनुदेशन और निरन्तर अभ्यास का सुनियोजन किया जा सकता है। अभिवृद्धि से आशय है – आकार, वजन, विस्तार जटिलता आदि की दृष्टि से बढ़ना, जबकि विकास का अर्थ है—व्यक्ति का एक अवस्था से दूसरी अवस्था में पदार्पण करना। इस तरह अभिवृद्धि का स्वरूप परिमाणात्मक रहता है, जबकि विकास का स्वरूप गुणात्मक होता है।

प्रश्न ii (e) विकास एवं वृद्धि में चार अन्तर बताइए ।
वृद्धि और विकास में अन्तर बताइए।

विकास
1. विकास जीवनपर्यन्त एक व्यवस्थित और लगातार होने वाला परिवर्तन है।
2. विकास कभी भी नहीं रुकता। यह परिपक्वता की अवस्था प्राप्त होने पर भी विकासपथ पर अग्रसर रहता है।

3. विकास वातावरण से भी सम्बन्धित होता है।

4. यह मात्रात्मक पहलुओं का नहीं बल्कि गुणवत्ता और स्वरूप के परिवर्तन की ओर संकेत देता है।

अभिवृद्धि

1. वृद्धि जीवनपर्यन्त नहीं होती। एक निश्चित आयु के पश्चात् रुक जाती है।
2. परिपक्व अवस्था प्राप्त होते ही अभिवृद्धि रुक जाती है।
3. अभिवृद्धि का सम्बन्ध शारीरिक तथा मानसिक परिपक्वता से है।
4. मात्रात्मक पहलू में परिवर्तन अभिवृद्धि के क्षेत्र में आता है।

प्रश्न ii (F) अभिवृद्धि की परिभाषा ।
ANSWER-

(1) मेरीडिथ के अनुसार, “कुछ लेखक अभिवृद्धि का प्रयोग केवल आकार की वृद्धि के अर्थ में करते हैं और विकास का विभेदीकरण के अर्थ में है।”

(2) फ्रैंक के अनुसार, “अभिवृद्धि से तात्पर्य कोशिकाओं में होने वाली वृद्धि से होता है, जैसे, लम्बाई और भार में वृद्धि, जबकि विकास से तात्पर्य प्राणी में होने वाले सम्पूर्ण परिवर्तनों से होता है।”

प्रश्न ii (F) विकास की परिभाषा दीजिए।
OR
विकास का अर्थ बताइये।
ANSWER-

(1) डी0एन0 श्रीवास्तव के अनुसार, “विकास का आशय किसी जीवधारी में प्रगतिपूर्ण परिपक्वात्मक क्रमिक परिवर्तनों की श्रृंखला से है जो अनेक संरचनाओं और प्रकार्यों के समन्वय के फलस्वरूप बनती है।”
(2) एण्डरसन के अनुसार, “विकास का अर्थ मात्र किसी जाति की ऊँचाई की योग्यता में कुछ वृद्धि से नहीं है। इसके स्थान पर विकास अनेक संरचनाओं और प्रकार्यों के समन्वय की एक जटिल प्रक्रिया है।”
(3) लाबाब के अनुसार, “विकास का अर्थ परिपक्वात्मक परिवर्तन या परिवर्तनों से है जो जीवधारी के जीवन में समय के साथ घटित होते हैं।”

प्रश्न iii (a) विकास की विशेषताएँ।
उत्तर-
विकास की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं-

1. विकास के फलस्वरूप व्यक्ति में अनेक नई विशेषताएं और क्षमताएं उत्पन्न होती हैं।
2. विकास प्रगतिपूर्ण श्रृंखला के रूप में घटित होता है।
3. विकास में क्रमिक परिवर्तन पायें जाते हैं। परिवर्तनों में निरन्तरता पायी जाती है। यह परिवर्तन अविराम गति से चलता है। विकास किसी भी अवस्था में सामान्य नहीं होता है
4. क्रमिक परिवर्तन एक-दूसरे के साथ किसी न किसी रूप से सम्बन्धित रहते हैं। यह परिवर्तन एक-दूसरे से अलग न होकर जुड़े हुए होते हैं।

प्रश्न iii (b) विकास-प्रतिमानों का महत्त्व।
अथवा
विकास के पक्ष।
उत्तर-

(1) बालक में किन-किन आयु स्तरों पर किन व्यवहारों का विकास प्रारम्भ होगा, एक बालक में एक विशिष्ट व्यवहार प्रतिमान का विकास किस सीमा तक होगा।
(2) जब भिन्न-भिन्न विकास प्रतिमानों के आँकड़े उपलब्ध होते हैं तो अन्य बालकों के विकास-प्रतिमानों को मानने में यह मानकों के रूप में उपयोगी होते हैं।
(3) जब माता-पिता और शिक्षकों को बालकों के सामान्य विकास-प्रतिमानों का ज्ञान पहले से होता है तो विकास के प्रारम्भ होने तक यह बालक के व्यवहार, रुचियों आदि को विकास की अवस्था प्रारम्भ होने से पहले उसका सुधार कर सकते हैं।

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