MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR GENDER SCHOOL AND SOCIETY SYLLABUS WITH NOTES

MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR PAPER GENDER SCHOOL AND SOCIETY SYLLABUS WITH NOTES

UNIVERSITY MAGADH UNIVERSITY
COURSE B.Ed. 1ST YEAR
PAPER C-6 GENDER SCHOOL AND SOCIETY



MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR PAPER GENDER SCHOOL AND SOCIETY SYLLABUS IN ENGLISH

UNIT 1: Gender Role in Home & Society

● Gender roles in society through family, caste, religion, culture (films, advertisements, songs etc.)
● Gender law and the state
● Opportunities for education to girls.
● Influence of home and society in gender identity construction.

UNIT 2: Gender and School

● Role of schools, peers, teachers, curriculum and text books etc. in challenging gender inequalities.
● Representation of gendered roles, relationships and ideas in text books & curricular (Nirantar, 2010).
● Positive nations of sexuality among young people impact larger issues.
● Identification sexual abuse/viloence & safety at school, home & beyond.

UNIT 3: Gender and Beliefs

● Critical reading of the media which propagates popular beliefs,
● Reinforcing gender roles in the popular culture and by implementation at school.
● Development Audio-Visual engagement for sensitized women issue.
● Importance of Gender and Beliefs

UNIT 4: Issues of masculinity and Femininity
● Emergence of gender specific roles for masculinity and femininity.

● Cross-cultural perspective
● Social construciton of masculinity and feminit.
● Examining how schools nurture/challenge in creation of young people as masculine & feminine selves.

UNIT 5: Gender Inequality in the school

● Patriarchies in interaction with other social structures and identies.
● Pedagogy to challenge gendered inequalities roles of family,.caste, religion and culture.
● Working towards gender equality in the classroom.
● Constitutional provisions for gender equality.




MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR PAPER GENDER SCHOOL AND SOCIETY SYLLABUS IN HINDI

यूनिट 1: घर और समाज में जेंडर की भूमिका
● परिवार, जाति, धर्म, संस्कृति (फ़िल्में, विज्ञापन, गाने आदि) के ज़रिए समाज में जेंडर की भूमिकाएँ।
● जेंडर से जुड़े कानून और राज्य।
● लड़कियों के लिए शिक्षा के अवसर।
● जेंडर पहचान बनाने में घर और समाज का प्रभाव।

यूनिट 2: जेंडर और स्कूल
● जेंडर असमानता को चुनौती देने में स्कूल, साथियों, शिक्षकों, पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों आदि की भूमिका।
● पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम में जेंडर-आधारित भूमिकाओं, रिश्तों और विचारों का चित्रण (निरंतर, 2010)।
● युवाओं में सेक्सुअलिटी (यौनिकता) के बारे में सकारात्मक सोच का बड़े मुद्दों पर असर।
● स्कूल, घर और बाहर यौन शोषण/हिंसा की पहचान और सुरक्षा।

यूनिट 3: जेंडर और मान्यताएँ
● लोकप्रिय मान्यताओं को फैलाने वाले मीडिया की आलोचनात्मक समझ।
● लोकप्रिय संस्कृति और स्कूल में लागू करने के ज़रिए जेंडर भूमिकाओं को मज़बूत करना।
● महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता के लिए ऑडियो-विज़ुअल जुड़ाव का विकास।
● जेंडर और मान्यताओं का महत्व।

यूनिट 4: मर्दानगी और स्त्रीत्व के मुद्दे
● मर्दानगी और स्त्रीत्व के लिए जेंडर-विशिष्ट भूमिकाओं का उभरना।
● अलग-अलग संस्कृतियों का नज़रिया।
● मर्दानगी और स्त्रीत्व का सामाजिक निर्माण।
● यह देखना कि स्कूल युवाओं में मर्दानगी और स्त्रीत्व की पहचान बनाने में कैसे मदद करते हैं या उसे चुनौती देते हैं।

यूनिट 5: स्कूल में जेंडर असमानता
● अन्य सामाजिक ढाँचों और पहचानों के साथ पितृसत्ता का संबंध।
● परिवार, जाति, धर्म और संस्कृति की जेंडर-आधारित असमानताओं को चुनौती देने वाली शिक्षण पद्धति।
● क्लासरूम में जेंडर समानता की दिशा में काम करना।
● जेंडर समानता के लिए संवैधानिक प्रावधान।

MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR PAPER GENDER SCHOOL AND SOCIETY UNIT-1 NOTES

यूनिट 1: घर और समाज में जेंडर की भूमिका
● परिवार, जाति, धर्म, संस्कृति (फ़िल्में, विज्ञापन, गाने आदि) के ज़रिए समाज में जेंडर की भूमिकाएँ।
● जेंडर से जुड़े कानून और राज्य।
● लड़कियों के लिए शिक्षा के अवसर।
● जेंडर पहचान बनाने में घर और समाज का प्रभाव।

प्रश्न 1- “घर और समाज में जेंडर (Gender) की भूमिका को स्पष्ट करते हुए परिवार, शिक्षा, कार्यस्थल तथा सामाजिक जीवन में जेंडर आधारित भूमिकाओं, असमानताओं एवं समानता स्थापित करने के उपायों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।”

उत्तर : “घर और समाज में जेंडर (Gender) की भूमिका को स्पष्ट करते हुए परिवार, शिक्षा, कार्यस्थल तथा सामाजिक जीवन में जेंडर आधारित भूमिकाओं, असमानताओं एवं समानता स्थापित करने के उपायों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।”

उत्तर –

 

भूमिका-

जेंडर (Gender) एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवधारणा है, जो यह निर्धारित करती है कि समाज स्त्री, पुरुष तथा अन्य जेंडर पहचान वाले व्यक्तियों से किस प्रकार के व्यवहार, दायित्व एवं भूमिकाओं की अपेक्षा करता है। जेंडर जन्मजात (Sex) नहीं, बल्कि समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा निर्मित होता है। घर और समाज दोनों ही जेंडर भूमिकाओं के निर्माण एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

I. जेंडर (Gender) की अवधारणा

जेंडर से आशय उन सामाजिक, सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक भूमिकाओं, अपेक्षाओं तथा व्यवहारों से है, जिन्हें समाज स्त्री एवं पुरुष के लिए निर्धारित करता है। यह समय, स्थान एवं संस्कृति के अनुसार बदलता रहता है।

II. घर में जेंडर की भूमिका

परिवार बालक के समाजीकरण का प्रथम एवं सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। यहीं से जेंडर संबंधी धारणाओं का विकास प्रारंभ होता है।

1. कार्यों का विभाजन
महिलाओं को घरेलू कार्यों एवं बच्चों की देखभाल का दायित्व सौंपा जाता है।
पुरुषों को परिवार का आर्थिक उत्तरदायित्व निभाने वाला माना जाता है।
2. सामाजिक अपेक्षाएँ
लड़कों से साहसी, आत्मनिर्भर एवं नेतृत्वकारी होने की अपेक्षा की जाती है।
लड़कियों से विनम्र, आज्ञाकारी एवं घरेलू कार्यों में दक्ष होने की अपेक्षा की जाती है।
3. संसाधनों में असमानता
अनेक परिवारों में शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में लड़कों को प्राथमिकता दी जाती है।
इससे बालिकाओं के विकास एवं अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
4. निर्णय लेने में भागीदारी
कई परिवारों में महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में सीमित भागीदारी होती है।
इससे लैंगिक असमानता को बढ़ावा मिलता है।
III. समाज में जेंडर की भूमिका

समाज विभिन्न संस्थाओं एवं परंपराओं के माध्यम से जेंडर भूमिकाओं को प्रभावित करता है।

1. सामाजिक मान्यताएँ एवं परंपराएँ
रूढ़िवादी सोच स्त्री एवं पुरुष के लिए अलग-अलग भूमिकाएँ निर्धारित करती है।
इससे लैंगिक भेदभाव एवं असमानता बढ़ती है।
2. शिक्षा
शिक्षा जेंडर समानता का सबसे प्रभावी माध्यम है।
समावेशी एवं संवेदनशील शिक्षा रूढ़ियों को समाप्त करने में सहायक होती है।
3. कार्यस्थल
महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद वेतन असमानता, पदोन्नति में भेदभाव एवं कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी समस्याएँ आज भी विद्यमान हैं।
4. मीडिया एवं संस्कृति
मीडिया कभी-कभी पारंपरिक जेंडर रूढ़ियों को बढ़ावा देता है, जबकि सकारात्मक प्रस्तुति लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करती है।
IV. जेंडर आधारित असमानताएँ
शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों में असमानता।
वेतन एवं पदोन्नति में भेदभाव।
घरेलू हिंसा एवं लैंगिक उत्पीड़न।
निर्णय लेने के अधिकार में असमानता।
राजनीतिक एवं सामाजिक नेतृत्व में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व।
रूढ़िगत धारणाओं के कारण प्रतिभा एवं क्षमता का पूर्ण विकास न हो पाना।
V. लैंगिक समानता स्थापित करने के उपाय

1. गुणवत्तापूर्ण एवं समान शिक्षा
सभी बच्चों को समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।
पाठ्यक्रम में जेंडर संवेदनशील विषय-वस्तु शामिल की जाए।
2. परिवार में समान व्यवहार
लड़के एवं लड़कियों को समान अवसर, अधिकार एवं जिम्मेदारियाँ दी जाएँ।
घरेलू कार्यों में समान सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाए।
3. आर्थिक सशक्तिकरण
महिलाओं को कौशल विकास, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।
4. कानूनी जागरूकता
महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों से संबंधित कानूनों की जानकारी दी जाए तथा उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
5. सामाजिक जागरूकता
जनजागरूकता अभियान चलाकर जेंडर रूढ़ियों एवं भेदभावपूर्ण सोच को समाप्त किया जाए।
6. शिक्षक एवं विद्यालय की भूमिका
शिक्षक कक्षा में समान अवसर प्रदान करें।
जेंडर-निष्पक्ष भाषा एवं व्यवहार अपनाएँ।
सभी विद्यार्थियों को नेतृत्व, खेल, विज्ञान एवं अन्य गतिविधियों में समान भागीदारी का अवसर दें।
निष्कर्ष

घर और समाज जेंडर भूमिकाओं के निर्माण के प्रमुख आधार हैं। यदि परिवार, विद्यालय एवं समाज मिलकर समानता, सम्मान एवं न्याय के मूल्यों को बढ़ावा दें, तो जेंडर आधारित भेदभाव को कम किया जा सकता है। शिक्षा, जागरूकता, संवेदनशील सामाजिक दृष्टिकोण तथा समान अवसरों के माध्यम से ही लैंगिक समानता पर आधारित न्यायपूर्ण एवं समावेशी समाज का निर्माण संभव है।

 

NOTES WATING

MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR PAPER GENDER SCHOOL AND SOCIETY UNIT-2 NOTES

यूनिट 2: जेंडर और स्कूल
● जेंडर असमानता को चुनौती देने में स्कूल, साथियों, शिक्षकों, पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों आदि की भूमिका।
● पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम में जेंडर-आधारित भूमिकाओं, रिश्तों और विचारों का चित्रण (निरंतर, 2010)।
● युवाओं में सेक्सुअलिटी (यौनिकता) के बारे में सकारात्मक सोच का बड़े मुद्दों पर असर।
● स्कूल, घर और बाहर यौन शोषण/हिंसा की पहचान और सुरक्षा।

NOTES WATING

 

 

 

MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR PAPER GENDER SCHOOL AND SOCIETY UNIT-3 NOTES

यूनिट 3: जेंडर और मान्यताएँ
● लोकप्रिय मान्यताओं को फैलाने वाले मीडिया की आलोचनात्मक समझ।
● लोकप्रिय संस्कृति और स्कूल में लागू करने के ज़रिए जेंडर भूमिकाओं को मज़बूत करना।
● महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता के लिए ऑडियो-विज़ुअल जुड़ाव का विकास।
● जेंडर और मान्यताओं का महत्व।

NOTES WATING

MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR PAPER GENDER SCHOOL AND SOCIETY UNIT-4 NOTES

यूनिट 4: मर्दानगी और स्त्रीत्व के मुद्दे
● मर्दानगी और स्त्रीत्व के लिए जेंडर-विशिष्ट भूमिकाओं का उभरना।
● अलग-अलग संस्कृतियों का नज़रिया।
● मर्दानगी और स्त्रीत्व का सामाजिक निर्माण।
● यह देखना कि स्कूल युवाओं में मर्दानगी और स्त्रीत्व की पहचान बनाने में कैसे मदद करते हैं या उसे चुनौती देते हैं।

NOTES WATING

 

MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR PAPER GENDER SCHOOL AND SOCIETY UNIT-5 NOTES

यूनिट 5: स्कूल में जेंडर असमानता
● अन्य सामाजिक ढाँचों और पहचानों के साथ पितृसत्ता का संबंध।
● परिवार, जाति, धर्म और संस्कृति की जेंडर-आधारित असमानताओं को चुनौती देने वाली शिक्षण पद्धति।
● क्लासरूम में जेंडर समानता की दिशा में काम करना।
● जेंडर समानता के लिए संवैधानिक प्रावधान।

 

NOTES WATING

Share This Post

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More To Explore

UNDERSTANDING THE SELF NOTES
B.Ed. 2nd NOTES

EPC-4 UNDERSTANDING THE SELF NOTES

EPC-4 UNDERSTANDING THE SELF NOTES     प्रश्न –  स्वयं या ‘आत्म’ से आप क्या समझते है? एक शिक्षक के रूप में स्वयं को जानना

B.Ed. 1st YEAR NOTES

EPC-3 CRITICAL UNDERSTANDING OF ICT B.Ed. PRACTICAL FILE

EPC-3 CRITICAL UNDERSTANDING OF ICT B.Ed. PRACTICAL FILE   प्रश्न – ICT (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) क्या है? शिक्षा के क्षेत्र में ICT के विभिन्न

Scroll to Top