EPC-1 READING AND REFLECTING ON TEXT B.Ed. PRACTICAL FILE IN HINDI

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प्रश्न -‘पठन कौशल’ से आप क्या समझते है? पठन के विभिन प्रकारों (जैसे-गहन, विस्तृत और सांराश पठन) का विस्तार से वर्णन करें  

उत्तर –

  • भूमिका
  • पठन कौशल (Reading Skill) का अर्थ
  • पठन कौशल के उद्देश्य
  • पठन कौशल की विशेषताएँ
  • पठन के विभिन्न प्रकार
  • — गहन पठन (Intensive Reading)
  • — विस्तृत पठन (Extensive Reading)
  • — सारांश पठन (Summary Reading)
  • गहन, विस्तृत एवं सारांश पठन में अंतर
  • पठन कौशल का शैक्षिक महत्व
  • निष्कर्ष

भूमिका

पठन (Reading) भाषा अधिगम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कौशल है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी लिखित सामग्री को पढ़कर उसका अर्थ ग्रहण करते हैं, उसका विश्लेषण करते हैं तथा उससे नवीन ज्ञान प्राप्त करते हैं। पठन केवल शब्दों को पहचानने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि विचारों, भावनाओं एवं सूचनाओं को समझने, उनका मूल्यांकन करने तथा उन्हें जीवन में उपयोग करने की एक सक्रिय मानसिक प्रक्रिया है। प्रभावी पठन कौशल विद्यार्थियों के बौद्धिक, भाषाई एवं शैक्षिक विकास का आधार होता है।

I. पठन कौशल (Reading Skill) का अर्थ

पठन कौशल वह क्षमता है जिसके द्वारा व्यक्ति लिखित भाषा के शब्दों, वाक्यों एवं अनुच्छेदों को पढ़कर उनके अर्थ को समझता है, उनका विश्लेषण करता है तथा उनसे आवश्यक जानकारी प्राप्त करता है।

दूसरे शब्दों में, पठन कौशल केवल पढ़ना नहीं, बल्कि पढ़ी गई सामग्री को समझना, उसका अर्थ निकालना, निष्कर्ष निकालना तथा उसे व्यवहार में प्रयोग करने की क्षमता है।

II. पठन कौशल के उद्देश्य

  • लिखित भाषा को सही ढंग से समझना।
  • शब्द-भंडार (Vocabulary) का विकास करना।
  • भाषा दक्षता एवं संप्रेषण क्षमता बढ़ाना।
  • तार्किक एवं आलोचनात्मक चिंतन विकसित करना
  • अध्ययन की आदत एवं स्व-अधिगम को प्रोत्साहित करना।
  • ज्ञान, सूचना एवं अनुभवों का विस्तार करना।
  • परीक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता करना।

III. पठन कौशल की विशेषताएँ

  • यह भाषा अधिगम का ग्रहणात्मक (Receptive) कौशल है।
  • इसमें शब्द पहचान एवं अर्थ ग्रहण दोनों शामिल होते हैं।
  • यह ध्यान, एकाग्रता एवं चिंतन की मांग करता है।
  • पठन से ज्ञान एवं अनुभवों का विस्तार होता है।
  • यह अन्य भाषा कौशलों (श्रवण, वाचन एवं लेखन) को भी सुदृढ़ बनाता है।
  • यह स्वतंत्र अध्ययन की क्षमता विकसित करता है।

IV. पठन के विभिन्न प्रकार

पठन के अनेक प्रकार हैं, किन्तु शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में मुख्य रूप से गहन पठन, विस्तृत पठन एवं सारांश पठन का विशेष महत्व है।

1. गहन पठन (Intensive Reading)
अर्थ

गहन पठन वह पठन है जिसमें विद्यार्थी किसी पाठ को ध्यानपूर्वक एवं विस्तार से पढ़कर प्रत्येक शब्द, वाक्य, व्याकरण, भाषा-शैली तथा भाव को समझने का प्रयास करता है।

विशेषताएँ

प्रत्येक शब्द एवं वाक्य का सूक्ष्म अध्ययन किया जाता है।
शब्दार्थ एवं व्याकरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
पाठ की गहन समझ विकसित होती है।
शिक्षक का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण होता है।
सामान्यतः कक्षा शिक्षण में प्रयुक्त होता है।

उद्देश्य
भाषा की शुद्ध समझ विकसित करना।
व्याकरण एवं शब्दावली का विकास करना।
कठिन पाठों का सही अर्थ समझना।
विश्लेषणात्मक सोच विकसित करना।

उदाहरण

किसी कहानी, कविता या पाठ्यपुस्तक के अध्याय का प्रत्येक अनुच्छेद समझते हुए पढ़ना।

लाभ

  • विषय की गहरी समझ विकसित होती है।
  • भाषा दक्षता बढ़ती है।
  • शब्द-भंडार समृद्ध होता है।
  • आलोचनात्मक चिंतन का विकास होता है।

2. विस्तृत पठन (Extensive Reading)
अर्थ

विस्तृत पठन वह प्रक्रिया है जिसमें विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार अधिक मात्रा में विभिन्न प्रकार की पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं, समाचार-पत्रों अथवा अन्य सामग्री का सामान्य समझ के उद्देश्य से अध्ययन करता है।

विशेषताएँ

  • अधिक मात्रा में पढ़ना।
  • मुख्य उद्देश्य सामान्य जानकारी एवं आनंद प्राप्त करना।
  • प्रत्येक शब्द का अर्थ जानना आवश्यक नहीं।
  • विद्यार्थी की रुचि के अनुसार सामग्री का चयन।
  • स्व-अध्ययन को बढ़ावा देता है।

उद्देश्य

  • पढ़ने की आदत विकसित करना।
  • सामान्य ज्ञान एवं सूचना बढ़ाना।
  • भाषा प्रवाह विकसित करना।
  • आत्मविश्वास एवं स्वतंत्र अध्ययन की क्षमता विकसित करना।

उदाहरण

उपन्यास, बाल साहित्य, समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, जीवनी या कहानी संग्रह पढ़ना।

लाभ

  • भाषा में प्रवाह आता है।
  • सामान्य ज्ञान बढ़ता है।
  • कल्पनाशक्ति एवं रचनात्मकता विकसित होती है।
  • अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ती है।

3. सारांश पठन (Summary Reading)
अर्थ

सारांश पठन वह प्रक्रिया है जिसमें विद्यार्थी किसी पाठ को पढ़कर उसके मुख्य विचारों एवं महत्वपूर्ण बिंदुओं को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करता है।

विशेषताएँ

  • मुख्य विचारों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  • अनावश्यक विवरण छोड़ दिए जाते हैं।
  • संक्षिप्त एवं स्पष्ट अभिव्यक्ति होती है।
  • समझ एवं विश्लेषण दोनों का विकास होता है।

उद्देश्य

  • मुख्य तथ्यों की पहचान करना।
  • संक्षेपण क्षमता विकसित करना।
  • परीक्षा की तैयारी को सरल बनाना।
  • तार्किक सोच एवं अभिव्यक्ति में सुधार करना।

उदाहरण

किसी अध्याय को पढ़कर उसके मुख्य बिंदुओं का एक पृष्ठ में सार लिखना।

लाभ

  • पुनरावृत्ति सरल हो जाती है।
  • मुख्य विचार स्पष्ट हो जाते हैं।
  • लेखन एवं चिंतन क्षमता विकसित होती है।
  • समय की बचत होती है।

 




 

V. गहन, विस्तृत एवं सारांश पठन में अंतर

आधार गहन पठन विस्तृत पठन सारांश पठन
उद्देश्य गहराई से समझना सामान्य जानकारी एवं आनंद मुख्य विचारों का संक्षेप प्रस्तुत करना
अध्ययन का स्तर सूक्ष्म एवं विस्तृत व्यापक एवं सामान्य मुख्य बिंदुओं पर आधारित
सामग्री पाठ्यपुस्तक एवं कठिन पाठ कहानी, उपन्यास, समाचार आदि किसी भी पाठ का संक्षिप्त रूप
शिक्षक की भूमिका अधिक कम मार्गदर्शक
परिणाम गहन समझ ज्ञान एवं भाषा प्रवाह संक्षेपण एवं विश्लेषण क्षमता

 

VI. पठन कौशल के विकास हेतु शिक्षक की भूमिका

  • विद्यार्थियों की आयु एवं रुचि के अनुसार पठन सामग्री उपलब्ध कराना।
  • नियमित मौन एवं सस्वर पठन का अभ्यास कराना।
  • कठिन शब्दों एवं नए शब्दों का अर्थ स्पष्ट करना।
  • प्रश्नोत्तर, चर्चा एवं गतिविधि आधारित शिक्षण अपनाना।
  • पुस्तकालय एवं समाचार-पत्रों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
  • पठन प्रतियोगिता एवं कहानी वाचन जैसी गतिविधियाँ आयोजित करना।
  • डिजिटल सामग्री एवं ई-पुस्तकों का उपयोग कराना।
  • विद्यार्थियों को सारांश लेखन एवं समीक्षा लेखन का अभ्यास कराना।

VII. पठन कौशल का शैक्षिक महत्व

  • भाषा विकास में सहायक।
  • ज्ञान एवं सूचना का प्रमुख स्रोत।
  • आलोचनात्मक एवं रचनात्मक चिंतन का विकास।
  • स्व-अध्ययन एवं आजीवन अधिगम की आदत विकसित करता है।
  • शैक्षिक उपलब्धि एवं परीक्षा प्रदर्शन में सुधार।
  • व्यक्तित्व विकास एवं प्रभावी संप्रेषण क्षमता का विकास।
  • विभिन्न विषयों के अध्ययन में सफलता का आधार।

निष्कर्ष

पठन कौशल भाषा अधिगम का अत्यंत महत्वपूर्ण आधार है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी ज्ञान, सूचना तथा अनुभव प्राप्त करते हैं। गहन पठन विषय की गहरी समझ विकसित करता है, विस्तृत पठन अध्ययन की रुचि एवं ज्ञान का विस्तार करता है तथा सारांश पठन मुख्य विचारों को संक्षेप में प्रस्तुत करने की क्षमता विकसित करता है। यदि शिक्षक इन तीनों प्रकारों का संतुलित एवं उद्देश्यपूर्ण प्रयोग कराए, तो विद्यार्थियों में भाषा दक्षता, चिंतन शक्ति, आत्म-अध्ययन तथा आजीवन सीखने की प्रवृत्ति का प्रभावी विकास किया जा सकता है।

 




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