BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR F-5 भाषा की समझ तथा आरम्भिक भाषा विकास Previous Year Question Paper

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BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR भाषा की समझ तथा आरम्भिक भाषा विकास Previous Year Question Paper

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Topic  भाषा की समझ तथा आरम्भिक भाषा विकास Previous Year Question Paper 
Course  Bihar D.El.Ed. 1st Year Paper-5 Previous Year Question Paper 
Paper Code F-5
Full Marks 50
External 35
Internal 15



BIHAR D.El.Ed 1ST YEAR F-5 भाषा की समझ तथा आरम्भिक भाषा विकास 2025 Previous Year Question

खण्ड – क / Section – A
लघु उत्तरीय प्रश्न / Short Answer Type Questions
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य है :
It is compulsory to answer each question :

प्रश्न-01 भाषा प्रतीकों की वाचिक व्यवस्था है । स्पष्ट करें ?-2025

Que- Language is verbal arrangement of symbols. Explain.

उत्तर –

भूमिका

भाषा मनुष्य के विचारों, भावनाओं तथा अनुभवों को व्यक्त करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। मनुष्य भाषा के द्वारा दूसरों से संवाद करता है और समाज में अपने संबंधों को बनाए रखता है। भाषा का निर्माण ध्वनियों, शब्दों तथा उनके अर्थ से होता है। इसलिए भाषा को प्रतीकों की वाचिक व्यवस्था कहा जाता है।

भाषा प्रतीकों की वाचिक व्यवस्था क्यों है?

भाषा में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द किसी न किसी वस्तु, व्यक्ति, स्थान, विचार या भावना का प्रतीक होता है। जैसे “पुस्तक” शब्द सुनते ही हमारे मन में पुस्तक का चित्र उभर आता है। इसी प्रकार “जल”, “पेड़”, “विद्यालय” आदि शब्द अपने-अपने अर्थ का संकेत देते हैं। ये सभी शब्द प्रतीक हैं।

भाषा को वाचिक व्यवस्था इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका मूल रूप बोलकर व्यक्त किया जाता है। मनुष्य पहले बोलना सीखता है, उसके बाद पढ़ना और लिखना सीखता है। बोली जाने वाली भाषा ध्वनियों पर आधारित होती है और इन्हीं ध्वनियों को एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित करके अर्थपूर्ण शब्द और वाक्य बनाए जाते हैं। यदि ध्वनियों या शब्दों का क्रम बदल दिया जाए, तो अर्थ भी बदल सकता है। इसलिए भाषा एक व्यवस्थित वाचिक प्रणाली है।

भाषा सामाजिक स्वीकृति पर आधारित होती है। किसी समाज के लोग जिन प्रतीकों और शब्दों को स्वीकार करते हैं, वही उस समाज की भाषा बनते हैं। उदाहरण के लिए, हिंदी में “माँ” शब्द का एक निश्चित अर्थ है, जिसे सभी हिंदी भाषी समझते हैं। इसी प्रकार प्रत्येक भाषा के अपने-अपने प्रतीक और नियम होते हैं।

निष्कर्ष

अतः स्पष्ट है कि भाषा प्रतीकों की वाचिक व्यवस्था है, क्योंकि इसमें ध्वनियों और शब्दों के रूप में प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है तथा इन्हें एक निश्चित क्रम और नियम के अनुसार बोलकर विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है। यही व्यवस्था भाषा को प्रभावी, अर्थपूर्ण और संचार का सशक्त माध्यम बनाती है।

 

अथवा / OR

प्रश्न-  अनुच्छेद- 348 में वर्णित भाषा प्रावधान का वर्णन कीजिए ।2025

Que-   Describe the language provision as described in Article 348.

उत्तर –

भूमिका

भारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ अनेक भाषाएँ और बोलियाँ प्रचलित हैं। संविधान निर्माताओं ने न्यायिक व्यवस्था तथा विधायी कार्यों में एकरूपता बनाए रखने के लिए भाषा संबंधी विशेष प्रावधान किए हैं। इन्हीं प्रावधानों में भारतीय संविधान का अनुच्छेद 348 महत्वपूर्ण है।

अनुच्छेद 348 के भाषा संबंधी प्रावधान

अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) तथा सभी उच्च न्यायालयों (High Courts) की कार्यवाही सामान्यतः अंग्रेज़ी भाषा में होगी।

संसद में बनाए जाने वाले सभी विधेयकों (Bills), अधिनियमों (Acts), अध्यादेशों (Ordinances), नियमों, विनियमों तथा आदेशों का अधिकृत पाठ भी अंग्रेज़ी भाषा में होगा।

यदि कोई राज्य अपने उच्च न्यायालय में हिंदी या किसी अन्य राज्यभाषा का प्रयोग करना चाहता है, तो इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है। हालांकि, ऐसे मामलों में भी निर्णयों एवं अधिकृत अभिलेखों का अंग्रेज़ी पाठ आवश्यक माना जाता है।

इस अनुच्छेद का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में न्यायिक कार्यों और कानूनी दस्तावेज़ों में एकरूपता, स्पष्टता तथा समानता बनाए रखना है, ताकि किसी भी प्रकार की भाषाई भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

अनुच्छेद 348 का महत्व

  1. न्यायालयों में भाषा की एकरूपता बनी रहती है।
  2. कानूनी दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता सुनिश्चित होती है।
  3. विभिन्न राज्यों के बीच न्यायिक समन्वय आसान होता है।
  4. न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्टता और पारदर्शिता बनी रहती है।

निष्कर्ष

अतः कहा जा सकता है कि अनुच्छेद 348 न्यायपालिका और विधायी कार्यों में भाषा के उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान है। इसका उद्देश्य पूरे देश में न्यायिक व्यवस्था को व्यवस्थित, स्पष्ट और समान बनाना है। यद्यपि भारत की राजभाषा हिंदी है, फिर भी न्यायिक कार्यों में अंग्रेज़ी का प्रयोग इस अनुच्छेद के अनुसार किया जाता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्यों में एकरूपता बनी रहती है।

प्रश्न-  2. केस स्टडी से आप क्या समझते हैं ?2025

Que-  What do you mean by case study?

उत्तर –

भूमिका

शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता, व्यवहार, पारिवारिक वातावरण तथा समस्याएँ अलग-अलग होती हैं। किसी एक विद्यार्थी या किसी विशेष परिस्थिति का गहराई से अध्ययन करने के लिए केस स्टडी (Case Study) विधि का प्रयोग किया जाता है। यह शिक्षकों को विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करती है।

केस स्टडी का अर्थ

केस स्टडी एक ऐसी अध्ययन विधि है, जिसमें किसी एक व्यक्ति, विद्यार्थी, परिवार, संस्था या किसी विशेष घटना का विस्तारपूर्वक और गहन अध्ययन किया जाता है। इसके माध्यम से उस व्यक्ति या घटना की वास्तविक स्थिति, समस्याओं, कारणों तथा उनके समाधान को समझने का प्रयास किया जाता है।

केस स्टडी की विशेषताएँ

  1. इसमें किसी एक व्यक्ति या एक विशेष मामले का गहराई से अध्ययन किया जाता है।
  2. यह वास्तविक तथ्यों और परिस्थितियों पर आधारित होती है।
  3. इसमें साक्षात्कार, अवलोकन, अभिलेख तथा अन्य स्रोतों से जानकारी एकत्र की जाती है।
  4. इससे समस्या के कारणों का पता लगाने और उचित समाधान खोजने में सहायता मिलती है।
  5. यह विद्यार्थी के शैक्षिक, सामाजिक तथा भावनात्मक विकास को समझने में उपयोगी होती है।

शिक्षा में केस स्टडी का महत्व

  • शिक्षक विद्यार्थियों की व्यक्तिगत समस्याओं को समझ पाते हैं।
  • कमजोर या विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने में सहायता मिलती है।
  • उचित शिक्षण एवं परामर्श की योजना बनाई जा सकती है।
  • विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहयोग मिलता है।
  • शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

निष्कर्ष

अतः कहा जा सकता है कि केस स्टडी किसी व्यक्ति, विद्यार्थी या विशेष परिस्थिति का गहन एवं व्यवस्थित अध्ययन करने की एक महत्वपूर्ण विधि है। शिक्षा के क्षेत्र में यह शिक्षक को विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, समस्याओं और क्षमताओं को समझने तथा उनके उचित समाधान के लिए प्रभावी निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है।

अथवा / OR

प्रश्न- बहुभाषिक कक्षा के महत्व का वर्णन कीजिए |2025

Que- Describe the importance of multilingual class.

उत्तर –

भूमिका

शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता, व्यवहार, पारिवारिक वातावरण तथा समस्याएँ अलग-अलग होती हैं। किसी एक विद्यार्थी या किसी विशेष परिस्थिति का गहराई से अध्ययन करने के लिए केस स्टडी (Case Study) विधि का प्रयोग किया जाता है। यह शिक्षकों को विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करती है।

केस स्टडी का अर्थ

केस स्टडी एक ऐसी अध्ययन विधि है, जिसमें किसी एक व्यक्ति, विद्यार्थी, परिवार, संस्था या किसी विशेष घटना का विस्तारपूर्वक और गहन अध्ययन किया जाता है। इसके माध्यम से उस व्यक्ति या घटना की वास्तविक स्थिति, समस्याओं, कारणों तथा उनके समाधान को समझने का प्रयास किया जाता है।

केस स्टडी की विशेषताएँ

  1. इसमें किसी एक व्यक्ति या एक विशेष मामले का गहराई से अध्ययन किया जाता है।
  2. यह वास्तविक तथ्यों और परिस्थितियों पर आधारित होती है।
  3. इसमें साक्षात्कार, अवलोकन, अभिलेख तथा अन्य स्रोतों से जानकारी एकत्र की जाती है।
  4. इससे समस्या के कारणों का पता लगाने और उचित समाधान खोजने में सहायता मिलती है।
  5. यह विद्यार्थी के शैक्षिक, सामाजिक तथा भावनात्मक विकास को समझने में उपयोगी होती है।

शिक्षा में केस स्टडी का महत्व

  • शिक्षक विद्यार्थियों की व्यक्तिगत समस्याओं को समझ पाते हैं।
  • कमजोर या विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने में सहायता मिलती है।
  • उचित शिक्षण एवं परामर्श की योजना बनाई जा सकती है।
  • विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहयोग मिलता है।
  • शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

निष्कर्ष

अतः कहा जा सकता है कि केस स्टडी किसी व्यक्ति, विद्यार्थी या विशेष परिस्थिति का गहन एवं व्यवस्थित अध्ययन करने की एक महत्वपूर्ण विधि है। शिक्षा के क्षेत्र में यह शिक्षक को विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, समस्याओं और क्षमताओं को समझने तथा उनके उचित समाधान के लिए प्रभावी निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है।

प्रश्न -3. भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची का क्या महत्व है ?2025

Que-What is the importance of eighth schedule of Constitution of India ?

उत्तर –

भूमिका

भारत अनेक भाषाओं और संस्कृतियों वाला देश है। यहाँ विभिन्न राज्यों में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं। देश की भाषाई विविधता को सम्मान और संरक्षण देने के लिए भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है।

आठवीं अनुसूची का महत्व

1. भारतीय भाषाओं को संवैधानिक मान्यता प्रदान करती है।
आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को संविधान द्वारा विशेष मान्यता प्राप्त होती है, जिससे उनका सम्मान और विकास सुनिश्चित होता है।

2. भाषाओं के विकास को बढ़ावा देती है।
सरकार इन भाषाओं के साहित्य, शिक्षा, अनुवाद तथा शोध कार्यों को प्रोत्साहित करती है। इससे भाषाओं का संरक्षण और विकास होता है।

3. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है।
विभिन्न भाषाओं को समान सम्मान मिलने से सभी भाषाई समुदायों में समानता और अपनापन बढ़ता है, जिससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।

4. प्रतियोगी परीक्षाओं में सुविधा प्रदान करती है।
आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं का उपयोग कई सरकारी एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में किया जा सकता है। इससे अभ्यर्थियों को अपनी भाषा में परीक्षा देने का अवसर मिलता है।

5. शिक्षा और संस्कृति का संरक्षण करती है।
इन भाषाओं के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और साहित्य का संरक्षण होता है तथा नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़ी रहती है।

6. प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करती है।
सरकार विभिन्न योजनाओं, दस्तावेज़ों और जनसंपर्क कार्यों में इन भाषाओं का उपयोग कर सकती है, जिससे लोगों तक जानकारी आसानी से पहुँचती है।

निष्कर्ष

अतः कहा जा सकता है कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची देश की भाषाई विविधता को सम्मान देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह भारतीय भाषाओं के संरक्षण, विकास, शिक्षा, साहित्य तथा राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है। इसलिए आठवीं अनुसूची का भारतीय लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था में विशेष महत्व है।

 

अथवा / OR

प्रश्न -भारतीय संविधान के अनुच्छेद 345 में वर्णित भाषा प्रावधान का वर्णन कीजिए ।2025

Que-Describe the language provisions as described in Article 345 of the Constitution of India. 

उत्तर –

 

 

 

प्रश्न -04. भाषा एकात्मक क्रिया है । वर्णन कीजिए ।2025

Que-Language is a unitary action. Describe.

उत्तर –

अथवा / OR

प्रश्न -प्रानव भाषा और पशु-पक्षियों की भाषा में अन्तर स्पष्ट करें |2025

Que-Differentiate between human language and animal language.

 

 

प्रश्न -5. पियाजे के अनुसार बच्चे भाषा कैसे सीखते हैं ?2025

According to Piaget, how do children learn a language ?

 

अथवा / OR

प्रश्न -वैदिक संस्कृत और अवेस्ता में तुलना कीजिए ।2025

Que-Compare between Vedic Sanskrit and Avesta.

उत्तर –

 

खण्ड – ख / Section – B
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न / Long Answer Type Questions
किसी एक प्रश्न का उत्तर लगभग 200 से 250 शब्दों में दें ।
Answer any one question in about 200 to 250 words.

प्रश्न -6. स्किनर एवं वायगोत्स्की के अनुसार बच्चे भाषा कैसे सीखते हैं ? 2025

Que-  According to Vygotsky and Skinner, how do children learn a language ?-१०

उत्तर –

 

प्रश्न -7. निम्नांकित में से किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें : 2 × 5 = 10

प्रश्न -7(क) लिपि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें |2025

उत्तर –

 

 

प्रश्न -7(ख) अनुच्छेद- 349 पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें |2025

उत्तर

प्रश्न -7(ग) अपभाषा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें?2025

उत्तर –

प्रश्न -7(घ ) अपभ्रंश भाषा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ?2025

उत्तर –

 

Write short notes on any two of the following:
(a) Script
(b) Article 349
(c) .Slang
(d) Apabhransha Language.

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